ढाका। बांग्लादेश बीते कई दिनों से गंभीर अशांति और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। 18 दिसंबर को शुरू हुई हिंसा थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। 19 दिसंबर को भी राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में तनावपूर्ण हालात बने रहे। सांस्कृतिक संगठन उदिची शिल्पी गोष्ठी के कार्यालय पर हमला कर तोड़फोड़ की गई और बाद में उसे आग के हवाले कर दिया गया, जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ गए।
आज बांग्लादेश में भारत विरोधी कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी को दफनाया जाएगा। इससे पहले राजधानी ढाका में उनके जनाजे की नमाज अदा की जाएगी। प्रशासन ने आशंका जताई है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। इसी को देखते हुए देशभर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मोहम्मद यूनूस कर रहे हैं, ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। सरकार की ओर से लोगों से जनाजे में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने की अपील भी की गई है। हालांकि, बीते अनुभवों को देखते हुए प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्क है।
हिंसा के चलते आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, सार्वजनिक परिवहन आंशिक रूप से ठप है और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही झड़पों और आगजनी से दहशत का माहौल बना हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कुछ कट्टरपंथी संगठनों द्वारा हालात को भड़काने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए भी अफवाहें फैलने की आशंका जताई गई है, जिस पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को अलर्ट किया गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बल संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं।
भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो हिंसा और ज्यादा फैल सकती है।
फिलहाल पूरे देश की नजरें आज होने वाली अंत्येष्टि पर टिकी हैं। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है कि वह शांति व्यवस्था बनाए रख पाए और बांग्लादेश को हिंसा के इस दौर से बाहर निकाल सके।

