1 Apr 2026, Wed

ATF की कीमतें दोगुनी से ज्यादा महंगी, पहली बार ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के पार, क्या महंगा होगा हवाई सफर?

विमान ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: हवाई किरायों पर पड़ेगा सीधा असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत के विमानन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), जिसे आमतौर पर जेट फ्यूल कहा जाता है, की कीमतों में बुधवार को ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद हवाई किरायों में भी जल्द ही इजाफा देखने को मिल सकता है, जिससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।

ATF की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी नए रेट के अनुसार, ATF की कीमतें दोगुनी से भी अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अब जेट फ्यूल की कीमत लगभग 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह पहली बार है जब ATF की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार गई है।

दिल्ली में ATF की कीमतें 96,638.14 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 207,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई हैं। यानी इसमें भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो एयरलाइंस के लिए बड़ा झटका है।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर

सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में करीब 115% और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लगभग 107% की बढ़ोतरी की है। इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ोतरी के चलते आने वाले दिनों में हवाई किराए में भी वृद्धि की जा सकती है। एयरलाइंस कंपनियां पहले ही बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे से जूझ रही हैं, और अब ईंधन की कीमतों में यह उछाल उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

प्रमुख शहरों में कीमतों का हाल

देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर ATF की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली में ATF की कीमतों में लगभग 114.5% की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह कोलकाता और चेन्नई में भी कीमतें 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं।

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ATF की कीमतों में करीब 115% की वृद्धि दर्ज की गई है। यहां कीमत 90,451.87 रुपये प्रति किलोलीटर से बढ़कर 1,94,968.67 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है।

बढ़ती लागत और एयरलाइंस पर दबाव

विमानन कंपनियों की कुल परिचालन लागत का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर करता है। ऐसे में ATF की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी एयरलाइंस के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसके अलावा, भारतीय रुपये में लगातार गिरावट भी स्थिति को और जटिल बना रही है, क्योंकि एयरलाइंस के कई खर्च डॉलर में होते हैं।

इस कारण एयरलाइंस कंपनियां टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे यात्रियों को आने वाले समय में महंगे हवाई किराए का सामना करना पड़ सकता है।

पिछले बदलाव और कारण

इससे पहले 1 मार्च को भी ATF की कीमतों में 5.7% (करीब 5,244.75 रुपये प्रति किलोलीटर) की बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है।

आगे की संभावनाएं

विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता नहीं आई, तो आने वाले महीनों में ATF की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका सीधा असर एयरलाइन उद्योग और हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों दोनों पर पड़ेगा।

फिलहाल, यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय टिकट की कीमतों में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखें, क्योंकि आने वाले समय में हवाई किराए और भी महंगे हो सकते हैं।

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