ऑस्कर विजेता संगीतकार A. R. Rahman के हालिया बयान पर मचा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस बहस में दिग्गज म्यूजिक कंपोजर Ismail Darbar भी कूद पड़े हैं। दरबार ने रहमान के उस बयान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में “कम्यूनल सोच” के संभावित प्रभाव की बात कही थी।
क्या था एआर रहमान का बयान?
हाल ही में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में रहमान से पूछा गया था कि क्या उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भाषाई या अन्य आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ा। इसके जवाब में रहमान ने कहा कि उन्हें सीधे तौर पर कभी भेदभाव का अनुभव नहीं हुआ, लेकिन पिछले 7–8 वर्षों में काम कम मिलने के पीछे “कम्यूनल के हल्के-फुल्के भेदभाव” या कम क्रिएटिव लोगों के निर्णय लेने की संभावना हो सकती है।
रहमान के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई। कई कलाकारों ने उनके तर्क से असहमति जताई और इसे बॉलीवुड की छवि के खिलाफ बताया।
इस्माइल दरबार ने क्या कहा?
22 से अधिक फिल्मों में संगीत दे चुके इस्माइल दरबार, जिन्हें खासतौर पर Devdas जैसी क्लासिक फिल्म के लिए जाना जाता है, ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में रहमान के बयान को खारिज किया। शुभोजीत घोष के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान दरबार ने कहा,
“अगर बॉलीवुड इंडस्ट्री सांप्रदायिक होती, तो इस देश में कोई भी मुसलमान स्टार नहीं बन पाता। इस्माइल दरबार, नौशाद या दिलीप कुमार जैसे सितारे नहीं होते। यह सब प्रतिभा और आपके भाग्य पर निर्भर करता है।”
दरबार ने आगे कहा कि रहमान बेहद प्रतिभाशाली हैं और उन्हें भगवान ने सब कुछ दिया है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि रहमान एक बेहतरीन साउंड डिजाइनर हैं, हालांकि उनके गानों को लेकर उन्होंने मिश्रित राय व्यक्त की।
फिल्म इंडस्ट्री में छिड़ी बहस
रहमान के बयान के बाद कई फिल्मी हस्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। कुछ ने माना कि इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा और बदलते ट्रेंड्स के कारण काम के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जबकि अन्य ने इसे व्यक्तिगत अनुभव बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना कई कारकों पर निर्भर करता है—जैसे ट्रेंड, प्रोड्यूसर की पसंद, बॉक्स ऑफिस की स्थिति और दर्शकों की बदलती रुचि। ऐसे में किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं है।
प्रतिभा बनाम धारणा
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बॉलीवुड में धार्मिक या साम्प्रदायिक सोच का प्रभाव है, या फिर यह केवल व्यक्तिगत अनुभव और धारणा का मामला है।
इस्माइल दरबार का मानना है कि इंडस्ट्री में सफलता का मूल आधार प्रतिभा और किस्मत है। वहीं रहमान ने अपने बयान में सीधे भेदभाव का आरोप नहीं लगाया, बल्कि संभावित कारणों का जिक्र किया था।
आगे क्या?
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों ही कलाकार भारतीय संगीत जगत के बड़े नाम हैं और उनकी राय को गंभीरता से लिया जा रहा है।
देखना होगा कि आने वाले दिनों में रहमान या अन्य कलाकार इस बहस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि इस बयान ने बॉलीवुड में काम के अवसरों, रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक माहौल पर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

