वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल का नेतृत्व अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बना रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अभी तक किसी नए हमले को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली नेतृत्व चाहता है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जाए। इस मुद्दे पर अमेरिकी नेतृत्व के साथ बातचीत भी हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुई चर्चा में ईरान की गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति पर विचार किया गया। हालांकि, सैन्य कार्रवाई की समयसीमा और उसके संभावित दायरे को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कूटनीतिक बातचीत से समाधान की कोशिश
एक ओर सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयास भी जारी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कतर के मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से बातचीत की है।
प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बहाल करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लागू प्रतिबंधों और नाकेबंदी को लेकर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका ने नहीं लिया अंतिम फैसला
अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी नेतृत्व कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प अपनाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
इजरायल के नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमेरिका ने नए हमलों को मंजूरी दे दी है। आगे की रणनीति क्षेत्रीय परिस्थितियों, बातचीत के नतीजों और सुरक्षा से जुड़े आकलन पर निर्भर करेगी।
अरब देशों को क्षेत्रीय युद्ध का डर
पश्चिम एशिया के कई देशों ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। क्षेत्रीय अधिकारियों को आशंका है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष दोबारा तेज होता है, तो इसका दायरा कई देशों तक फैल सकता है।
संभावित संघर्ष की स्थिति में यमन के हूती विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ने और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमलों का खतरा भी पैदा हो सकता है। इसके अलावा, इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र गुट भी संघर्ष में शामिल हो सकते हैं।
क्षेत्रीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि नया सैन्य टकराव पहले से अधिक गंभीर और विनाशकारी साबित हो सकता है। इससे नागरिकों की सुरक्षा, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
फिलहाल, अमेरिका की ओर से किसी नए हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और दोनों पक्षों के फैसले महत्वपूर्ण होंगे। दुनिया की नजर इस बात पर है कि तनाव कम करने के प्रयास सफल होते हैं या पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।

