सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए कीमती धातुओं की कीमतों में आई गिरावट राहत भरी खबर लेकर आई है। पिछले दो महीनों में दोनों धातुओं के दाम में बड़ी कमी दर्ज की गई है। कभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाली चांदी अब 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गई है, जबकि सोने की कीमत भी काफी फिसल चुकी है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने वाले ग्राहकों से लेकर निवेशकों तक की नजर बाजार के अगले रुख पर टिकी हुई है।
23 अक्टूबर 2026 को घरेलू वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, इसलिए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है।
दो महीने में सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ?
पिछले दो महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने की कीमत में करीब 22,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। वहीं, चांदी लगभग 54,000 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई है।
24 अगस्त 2026 को सोना 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर कारोबार कर रहा था। 23 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसका वायदा भाव गिरकर करीब 1,41,935 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।
इसी तरह, अगस्त में चांदी का भाव 2.48 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर था, जो अक्टूबर में गिरकर लगभग 1.94 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया। इस गिरावट के बाद खरीदारों को राहत मिली है, लेकिन बाजार में आगे क्या होगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
आज 24 कैरेट सोने का भाव क्या है?
23 अक्टूबर को MCX पर सोने का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में करीब 1,41,935 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि वायदा बाजार और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाले सोने के भाव में अंतर हो सकता है।
खुदरा कीमतें शहर, स्थानीय कर, अन्य शुल्क और ज्वेलर्स के मार्जिन के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। इसके अलावा, आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी कुल कीमत को प्रभावित करते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार से ताजा रेट की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
कीमती धातुओं की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का असर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की संभावना भी बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती है।
जब ब्याज देने वाले निवेश विकल्प आकर्षक होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव पड़ सकता है। चांदी की कीमत औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधियों से भी प्रभावित होती है। यही वजह है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव दोनों धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव ला सकता है।
क्या आने वाले दिनों में और सस्ता होगा सोना-चांदी?
सोने और चांदी की कीमतें आगे भी घटेंगी या फिर दोबारा बढ़ेंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर की चाल, कच्चे तेल और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर संबंधी नीतियों पर निर्भर करेगी।
जो लोग गहने खरीदना चाहते हैं, उन्हें अपनी जरूरत और बजट के अनुसार फैसला लेना चाहिए। वहीं, निवेश करने वालों के लिए केवल हालिया गिरावट के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं होगा। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए खरीदारी से पहले ताजा भाव और संबंधित जोखिमों को समझना जरूरी है।

