सोशल मीडिया पर इन दिनों गुजरात की एक महिला की कहानी चर्चा में है, जिसने अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार 365 दिनों तक मेहनत की। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ एक मशहूर यूट्यूबर से मिलने की कोशिश की, बल्कि अपनी इस मुहिम को समाज सेवा से भी जोड़ दिया। महिला जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाती रहीं, गरीब बच्चों की मदद करती रहीं और सोशल मीडिया पर रोजाना अपनी गतिविधियों की जानकारी साझा करती रहीं। आखिरकार उनकी कोशिश रंग लाई और चुनौती के आखिरी दिन उनकी मुलाकात उस लोकप्रिय यूट्यूबर से हो गई, जिससे मिलने का सपना उन्होंने देखा था।
अगस्त 2025 में शुरू की थी अनोखी चुनौती
गुजरात के सूरत की रहने वाली माया गुप्ता ने अगस्त 2025 में यह चुनौती शुरू की थी। उनका लक्ष्य मशहूर यूट्यूबर मिस्टरबीस्ट, जिनका असली नाम जिमी डोनाल्डसन है, से मिलना था। इसके लिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक अकाउंट बनाया और लगातार वीडियो पोस्ट करना शुरू किया।
माया हर दिन अपने वीडियो में यूट्यूबर को टैग करती थीं और अपनी कोशिशों के बारे में बताती थीं। शुरुआत में यह एक व्यक्तिगत सपना पूरा करने की पहल थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे जरूरतमंदों की सहायता करने वाले अभियान में बदल दिया।
जरूरतमंदों की मदद को बनाया मुहिम का हिस्सा
माया की इस यात्रा की खास बात यह रही कि उन्होंने पूरे अभियान के दौरान समाज सेवा पर भी ध्यान दिया। वह सूरत में जरूरतमंद बच्चों और परिवारों को खाना खिलाती थीं। इसके अलावा, उन्होंने लोगों को कपड़े और स्कूल बैग बांटने जैसे काम भी किए। छोटे स्ट्रीट वेंडर्स की मदद करने की जानकारी भी सामने आई है।
बताया जाता है कि इन गतिविधियों पर होने वाला खर्च वह अपनी बचत से उठाती थीं। हर दिन की कोशिश को वीडियो के माध्यम से साझा करने के कारण धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर लोग उनकी यात्रा से जुड़ने लगे। बड़ी संख्या में यूजर्स उनकी मेहनत और जरूरतमंदों की सहायता करने के तरीके को देखने लगे।
एक साल बाद मिलने की उम्मीद हुई पूरी
लगातार वीडियो पोस्ट करने और अपने अभियान को जारी रखने के बाद सितंबर 2026 में माया को एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया मिली। बताया गया कि मिस्टरबीस्ट की ओर से उनसे ईमेल और व्हाट्सऐप नंबर मांगा गया। इसके बाद उनकी मुलाकात की उम्मीदें और मजबूत हो गईं।
आखिरकार चुनौती के 365वें दिन माया की मुलाकात मशहूर यूट्यूबर से हुई। इस मुलाकात के दौरान उन्हें 10,000 डॉलर यानी लगभग 9.5 लाख रुपये का तोहफा भी दिया गया। यह पल उनके लिए बेहद खास रहा, क्योंकि एक साल तक लगातार कोशिश करने के बाद उनका सपना पूरा हुआ।
सोशल मीडिया पर चर्चा में आई कहानी
माया की कहानी सोशल मीडिया पर इसलिए भी लोगों का ध्यान खींच रही है, क्योंकि उन्होंने अपने लक्ष्य को केवल प्रसिद्धि पाने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी कोशिशों के साथ जरूरतमंदों की सहायता को भी प्राथमिकता दी। उनकी यात्रा दिखाती है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी व्यक्तिगत लक्ष्य को साझा करने के साथ सामाजिक कार्यों को सामने लाने के लिए भी किया जा सकता है।
हालांकि, इस तरह की कहानियों में वायरल पोस्ट और दावों की पुष्टि करना भी जरूरी है। फिलहाल माया गुप्ता की 365 दिनों की चुनौती और उनकी मुलाकात की कहानी इंटरनेट पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

