पंजाब: मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर गुरुवार को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। इसका असर राज्य के कई जिलों में देखने को मिला। होशियारपुर, जालंधर, मोगा, फिरोजपुर और मानसा सहित कई स्थानों पर दुकानें और बाजार बंद रहे। कुछ जिलों में निजी स्कूल और कॉलेज भी बंद रखे गए। बंद के कारण कई इलाकों में सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही दिखाई दी।
बंद का आह्वान करने वाले संगठनों ने इसे न्याय की मांग से जुड़ा कदम बताया है। उनके अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। बंद के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रखने की बात कही गई है, ताकि जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाएं मिलती रहें।
शाम पांच बजे तक बंद की अपील
मानसा एक्शन कमेटी की ओर से बंद का आह्वान शाम पांच बजे तक किया गया। इस दौरान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ-साथ किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे और कारोबार प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इसके अलावा, उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
बंद का उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान मामले की गंभीरता की ओर आकर्षित करना बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में बंद का प्रभाव स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग रहा।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर गठित संयुक्त कार्य समिति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), उप पुलिस अधीक्षक (DSP), थाना प्रभारी (SHO) और ड्रग इंस्पेक्टर को पद से हटाने की मांग भी की है। समिति का आरोप है कि मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और जांच के दौरान सभी पहलुओं को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
इन मांगों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी, यह आगे स्पष्ट होगा। फिलहाल, संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाए रखने की बात कही है।
मानसा में तनाव के बाद बढ़ी नाराजगी
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में लोगों के बीच नाराजगी देखने को मिली। घटना के बाद कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं। आरोपियों से जुड़े एक मेडिकल स्टोर और मकान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी स्थिति चर्चा में रही। एक स्थान पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटना की जानकारी भी सामने आई थी।
ऐसे घटनाक्रम के बीच प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की मांगों पर उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की चुनौती है। किसी भी आपराधिक मामले में दोष और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना जरूरी है।
आम जनजीवन और कारोबार पर असर
पंजाब बंद के कारण कई बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। निजी शिक्षण संस्थानों के बंद रहने से विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा। वहीं, आपातकालीन सेवाएं चालू रहने से जरूरी सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया।
अब सभी की नजरें मामले की जांच, प्रशासन के अगले कदम और प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों की मांग है कि मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

