15 Oct 2026, Thu

पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा, 29 बच्चों की मौत; घायलों में कई की हालत नाजुक

पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में 29 बच्चों और एक महिला शिक्षिका की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में छह लोगों की हालत गंभीर है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू किया। मलबे में अब भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की चिंता बनी हुई है।

अफरीदी आबाद इलाके में हुआ हादसा

यह दुर्घटना पेशावर के अफरीदी आबाद इलाके में हुई, जहां एक निजी स्कूल की छत अचानक ढह गई। हादसे के समय स्कूल में बच्चे और कर्मचारी मौजूद थे। छत गिरने के कारण कई लोग मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए प्रयास शुरू किए और संबंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी दी।

हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की उम्र लगभग सात से 13 वर्ष के बीच बताई गई है। इतनी कम उम्र के बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों में मातम पसरा हुआ है। घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और इमारतों की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

30 से ज्यादा लोग घायल, छह की हालत गंभीर

घटना में घायल हुए लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायलों में छह की स्थिति नाजुक बनी हुई है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में आपात व्यवस्था लागू की गई, ताकि घायलों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता मिल सके।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम घायलों के इलाज में जुटी हुई है। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी

हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन एंबुलेंस और राहत दल घटनास्थल पर पहुंचे। बचावकर्मियों ने मलबा हटाने और उसमें दबे लोगों की तलाश के लिए अभियान शुरू किया। आशंका है कि कुछ अन्य लोग भी मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं।

बचाव कार्य के दौरान सावधानी बरती जा रही है, ताकि मलबे को हटाते समय किसी फंसे हुए व्यक्ति को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे। जब तक तलाश अभियान पूरा नहीं हो जाता, तब तक हादसे में प्रभावित लोगों की अंतिम संख्या को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।

प्रधानमंत्री ने जताया दुख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को धैर्य और शक्ति मिले। घटना के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने राहत कार्य पूरा करने तथा पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने की चुनौती है।

इमारतों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

पाकिस्तान में इससे पहले भी इमारतों और छतों के गिरने से जानलेवा हादसे हो चुके हैं। कमजोर निर्माण, रखरखाव में लापरवाही और सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन न होना ऐसी घटनाओं के संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस विशेष हादसे की वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

इस साल जून में लाहौर के एक ट्यूशन सेंटर में छत गिरने से कई बच्चों की मौत हुई थी। वहीं, कराची के लियारी इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने से भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी।

पेशावर की घटना ने एक बार फिर स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच, निर्माण गुणवत्ता और नियमित रखरखाव की जरूरत को उजागर किया है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान जारी है और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच महत्वपूर्ण होगी।

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