13 Oct 2026, Tue

अफगानिस्तान प्रीमियर लीग से पीछे हटे ओली पोप समेत 3 इंग्लिश क्रिकेटर, तालिबान विवाद बना वजह

नई दिल्ली: अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। तालिबान शासन के दौरान महिलाओं के अधिकारों और खेलों में उनकी भागीदारी पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर उठ रही आलोचनाओं के बीच इंग्लैंड के तीन क्रिकेटरों ने टूर्नामेंट के ड्राफ्ट से अपने नाम वापस ले लिए हैं। इन खिलाड़ियों में ओली पोप, डेविड विली और विल स्मीड शामिल हैं। उनके इस फैसले से लीग में इंग्लैंड के खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर चल रही चर्चा और तेज हो गई है।

ओली पोप इंग्लैंड की टेस्ट टीम के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हैं और वह टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। ड्राफ्ट में उनका नाम सामने आने के बाद उनकी संभावित भागीदारी पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया। डेविड विली और विल स्मीड ने भी अपने नाम वापस ले लिए हैं।

महिलाओं के अधिकारों को लेकर उठे सवाल

इस विवाद की मुख्य वजह अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों और खेलों में उनकी भागीदारी पर लगी पाबंदियां हैं। वर्ष 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद से महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी को लेकर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। खेलों में महिलाओं की सीमित भागीदारी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है।

इसी मुद्दे को लेकर इंग्लैंड क्रिकेट प्रशासन ने अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट मुकाबले खेलने से दूरी बनाए रखने का रुख अपनाया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दोनों देशों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती रही हैं।

ऐसे माहौल में अफगानिस्तान की घरेलू टी20 लीग में इंग्लैंड के खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर नैतिक सवाल उठने लगे थे। खिलाड़ियों के नाम वापस लेने के फैसले को इसी व्यापक बहस के बीच देखा जा रहा है।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के सामने कानूनी और नैतिक चुनौती

अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में इंग्लैंड के खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। बोर्ड के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि खिलाड़ियों को लीग में खेलने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी देने के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा।

बोर्ड के अध्यक्ष रिचर्ड थॉम्पसन ने भी इस विषय पर चिंता जताई थी। ब्रिटेन के रोजगार और व्यापार संबंधी कानूनों के कारण खिलाड़ियों को किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोकने की कानूनी सीमाएं हो सकती हैं। ऐसे में बोर्ड के लिए खिलाड़ियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।

खिलाड़ियों से नैतिक पक्ष पर विचार करने की अपील

इंग्लैंड क्रिकेट के पुरुष क्रिकेट निदेशक रॉब की ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को किसी लीग में हिस्सा लेने का फैसला करते समय वहां की परिस्थितियों और नैतिक पहलुओं पर विचार करना चाहिए। उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ किए जा रहे व्यवहार पर असहमति भी जताई।

ओली पोप, डेविड विली और विल स्मीड के नाम वापस लेने से यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, उनके फैसलों के पीछे अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों की आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी एक वजह को निर्णायक नहीं माना जा सकता।

फिलहाल, अफगानिस्तान प्रीमियर लीग के आयोजकों के सामने खिलाड़ियों की भागीदारी और प्रतियोगिता को लेकर उठ रहे सवाल अहम बने हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अन्य विदेशी खिलाड़ी इस लीग में हिस्सा लेने का फैसला करते हैं या नहीं।

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