दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद फिल्म जगत में शोक का माहौल है। उनके अंतिम संस्कार में मराठी सिनेमा से जुड़े कई कलाकारों और बड़ी संख्या में किसानों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। हालांकि, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई चर्चित सितारों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और फिल्म निर्माता प्रवीण तरडे ने निराशा जाहिर की है। उनका कहना है कि नाना पाटेकर कई बॉलीवुड सितारों को अपना दोस्त मानते थे, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि वे अभिनेता को अंतिम विदाई देने जरूर पहुंचेंगे।
बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी से हुए निराश
प्रवीण तरडे ने एक बातचीत के दौरान कहा कि नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के ज्यादा लोगों का शामिल नहीं होना उन्हें खला। उनके मुताबिक, नाना जिन लोगों को अपना मित्र समझते थे, उनमें से कुछ को कम से कम इस दुख की घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए था।
हालांकि, प्रवीण ने यह भी स्पष्ट किया कि बॉलीवुड सितारों के नहीं पहुंचने से नाना पाटेकर की महानता पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके अनुसार, नाना की पहचान केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं थी, बल्कि वह जमीन से जुड़े ऐसे इंसान थे, जिन्होंने किसानों और समाज के प्रति अपने जुड़ाव को हमेशा महत्व दिया।
किसानों की मौजूदगी को बताया खास
प्रवीण तरडे ने नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद किसानों का नाना के प्रति सम्मान उनकी लोकप्रियता और उनके जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है।
उनके मुताबिक, नाना खुद को केवल अभिनेता नहीं, बल्कि किसान भी मानते थे। यही वजह थी कि उनके अंतिम संस्कार में किसानों की भागीदारी उनके लिए विशेष मायने रखती है। प्रवीण ने किसानों की मेहनत, सादगी और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी किसी भी बड़े सितारे की मौजूदगी से कम महत्वपूर्ण नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि नाना की असली महानता उनकी प्रसिद्धि या फिल्मी उपलब्धियों तक सीमित नहीं थी। उनका व्यक्तित्व और आम लोगों के साथ उनका जुड़ाव ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता था।
नाना खुद को किसान बताना पसंद करते थे
प्रवीण तरडे के अनुसार, नाना पाटेकर अक्सर अपनी पहचान को लेकर जमीन से जुड़े रहना पसंद करते थे। वह खुद को केवल फिल्मी दुनिया का हिस्सा मानने के बजाय किसान के रूप में भी देखते थे। यही सोच उनके व्यक्तित्व की एक खास पहचान बन गई थी।
प्रवीण ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि नाना को अंतिम विदाई देने के लिए बॉलीवुड से और भी लोग पहुंचेंगे। उनकी निराशा का कारण यही था कि जिन लोगों को नाना अपना दोस्त समझते थे, उनमें से अधिक लोगों की मौजूदगी देखने को नहीं मिली।
अंतिम विदाई के बाद चर्चा में आया फिल्म जगत का रिश्ता
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को पुणे में किया गया था। उनके परिवार, करीबी लोगों और मराठी फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से कुछ जाने-माने चेहरे भी मौजूद रहे, लेकिन कई अन्य चर्चित सितारों की अनुपस्थिति पर सवाल उठे।
प्रवीण तरडे की प्रतिक्रिया ने फिल्म जगत में दोस्ती, रिश्तों और मुश्किल समय में साथ खड़े होने की अहमियत पर नई चर्चा शुरू कर दी है। उनका संदेश साफ है कि किसी कलाकार की असली पहचान केवल उसकी लोकप्रियता से नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में उसके लिए मौजूद सम्मान और उसके मानवीय रिश्तों से भी तय होती है। नाना पाटेकर के प्रति किसानों का जुड़ाव इसी बात का उदाहरण बनकर सामने आया है।

