9 Oct 2026, Fri

SIR आंदोलन पर INDIA गठबंधन में दरार! राष्ट्रपति से मुलाकात में शामिल नहीं होगी UBT शिवसेना, इस बात से है नाराज

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विरोध के बीच विपक्षी गठबंधन में आपसी मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल की राष्ट्रपति से प्रस्तावित मुलाकात में शिवसेना UBT शामिल नहीं होगी। इस फैसले के बाद विपक्षी एकता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जानकारी के मुताबिक, शिवसेना UBT आखिरी समय पर न्योता मिलने से नाराज है। हालांकि, पार्टी के प्रतिनिधियों के शामिल नहीं होने के पीछे नेताओं की पहले से तय व्यस्तताओं का भी हवाला दिया गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह फैसला केवल समय और कार्यक्रम से जुड़ा है या विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कमी भी इसकी वजह है।

आखिरी समय पर न्योता मिलने से नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना UBT का कहना है कि राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए उसे अंतिम समय पर आमंत्रित किया गया। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे शुक्रवार को मुंबई में सांसदों और विभाग प्रमुखों के साथ बैठक कर रहे हैं। इसी कारण पार्टी के सांसदों के दिल्ली पहुंचने की संभावना नहीं है।

वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत के भी दो दिन के पुणे दौरे पर होने की जानकारी सामने आई है। इन परिस्थितियों के चलते शिवसेना UBT का कोई प्रतिनिधि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होगा।

राष्ट्रपति से प्रस्तावित मुलाकात का उद्देश्य SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को सामने रखना बताया गया है। विपक्षी दल इन विषयों पर अपनी आपत्तियां और चिंताएं राष्ट्रपति के समक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं।

बीजेपी ने विपक्षी एकता पर उठाए सवाल

शिवसेना UBT के फैसले को लेकर महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल के एक वरिष्ठ नेता ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन और महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है।

उनका आरोप है कि विपक्षी दल केवल केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने के लिए एकजुट हुए हैं, लेकिन उनके बीच आपसी सहमति की कमी है। उन्होंने विपक्षी दलों के बीच पहले भी सामने आए मतभेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गठबंधन प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहा है।

हालांकि, ये बयान राजनीतिक आरोपों के रूप में देखे जाने चाहिए। शिवसेना UBT के इस फैसले से जुड़े कारणों की पूरी तस्वीर पार्टी के आधिकारिक पक्ष और आगे की घटनाओं से ही स्पष्ट होगी।

पहले भी सामने आ चुके हैं विपक्षी दलों के मतभेद

विपक्षी गठबंधन में विभिन्न मुद्दों पर पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियां, सीटों को लेकर रणनीति और कार्यक्रमों के समन्वय जैसे विषय दलों के बीच असहमति की वजह बनते रहे हैं।

इस बार राष्ट्रपति से मुलाकात में शिवसेना UBT की गैरमौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दी है। हालांकि, किसी एक कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को अपने आप में गठबंधन टूटने का संकेत नहीं माना जा सकता।

SIR के खिलाफ आंदोलन पर क्या होगा असर?

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने में जुटे हैं।

ऐसे में विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल आंदोलन की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवसेना UBT की गैरमौजूदगी से राजनीतिक बहस जरूर तेज हुई है, लेकिन इससे आंदोलन पर कितना असर पड़ेगा, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

फिलहाल, इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता और आपसी समन्वय को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में संबंधित दलों के बयान और उनके अगले कदम इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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