9 Oct 2026, Fri

JNU के जिस प्रोफेसर पर 11 छात्राओं ने लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप, उसे किया गया बर्खास्त; जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को 11 छात्राओं की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की जांच संस्थान की आंतरिक समिति ने की थी। समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया गया।

इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की सुरक्षा, शिकायतों के निपटारे और उच्च शिक्षण संस्थानों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

आंतरिक समिति की जांच के आधार पर कार्रवाई

मिली जानकारी के अनुसार, इसी साल मई में 11 छात्राओं ने एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने की। समिति ने उपलब्ध तथ्यों और संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर अपनी जांच पूरी की।

जांच के नतीजों के आधार पर समिति ने सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की। इसमें केंद्रीय सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमों के नियम 11(ix) का भी उल्लेख किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।

हालांकि, मामले से जुड़े सभी विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए कार्रवाई से संबंधित तथ्यों को प्रशासनिक निर्णय और जांच के उपलब्ध विवरण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

महिला आयोग ने भी मांगी थी कार्रवाई की रिपोर्ट

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग ने भी हस्तक्षेप किया था। आयोग ने छात्राओं की शिकायतों और विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की कार्रवाई के संबंध में संस्थान से रिपोर्ट मांगी थी।

आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा था कि शिकायत दर्ज होने के बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची है। आयोग ने यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में लागू कानून के तहत गठित आंतरिक समिति की कार्यवाही की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे।

बताया गया था कि शिकायत दर्ज होने और जांच शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से कार्रवाई की स्थिति को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित थी। इसी कारण आयोग ने मामले की प्रगति पर स्पष्टीकरण मांगा था।

POSH कानून के तहत शिकायतों की जांच

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण के लिए POSH कानून लागू है। इसके तहत निर्धारित संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति गठित करने और शिकायतों की जांच की व्यवस्था की जाती है। उच्च शिक्षण संस्थानों में भी शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करना जरूरी है।

ऐसे मामलों में शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता बनाए रखना, निष्पक्ष जांच करना और संबंधित पक्षों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर देना महत्वपूर्ण होता है।

छात्राओं की सुरक्षा और जवाबदेही पर फिर चर्चा

इस मामले में कार्रवाई के बाद शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने और शिकायतों का समय पर निपटारा करने की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। विश्वविद्यालयों में छात्राओं को बिना डर अपनी शिकायत दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए और ऐसी शिकायतों की जांच निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए।

प्रोफेसर की बर्खास्तगी विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लिया गया महत्वपूर्ण कदम है। अब इस मामले को लेकर आगे किसी अतिरिक्त प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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