8 Oct 2026, Thu

ब्रह्मोस SU-30 का पहला एक्सक्लूसिव वीडियो आया सामने, देखकर कांप उठेंगे पाकिस्तान और चीन

नई दिल्ली: वायुसेना दिवस के अवसर पर हिंडन एयरबेस पर आयोजित पूर्वाभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना की सैन्य क्षमता और ऑपरेशनल तैयारियों की झलक देखने को मिली। इस दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से लैस SU-30 MKI लड़ाकू विमान खास आकर्षण का केंद्र रहा। इसके साथ राफेल, तेजस, सुखोई और आकाश जैसी प्रणालियों तथा विमानों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

ब्रह्मोस से लैस SU-30 MKI की तस्वीरें सामने आने के बाद इसे भारतीय वायुसेना की बढ़ती मारक क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणालियों के एकीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कॉम्बिनेशन लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करता है।

हिंडन एयरबेस पर दिखी ऑपरेशनल तैयारी

वायुसेना दिवस के लिए हिंडन एयरबेस पर चल रहे पूर्वाभ्यास में विभिन्न लड़ाकू विमानों और मिसाइल प्रणालियों को शामिल किया गया। अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना की अलग-अलग क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया।

SU-30 MKI को ब्रह्मोस मिसाइल के साथ देखा गया। यह संयोजन भारतीय वायुसेना की एयर-टू-सरफेस स्ट्राइक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारी वजन वाली ब्रह्मोस मिसाइल को ले जाने और इस्तेमाल करने के लिए SU-30 MKI में आवश्यक एकीकरण किया गया है।

ब्रह्मोस और SU-30 का कॉम्बिनेशन क्यों खास?

SU-30 MKI भारतीय वायुसेना के प्रमुख मल्टीरोल लड़ाकू विमानों में शामिल है। वहीं ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है, जिसे अलग-अलग प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित की गई है।

SU-30 MKI के साथ इसके एकीकरण से लड़ाकू विमान को अपने बेस से काफी दूरी पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ मिसाइल क्षमता का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलता है। इससे विमान को हर स्थिति में लक्ष्य के बेहद करीब जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

ब्रह्मोस की खासियत इसकी तेज गति और सटीकता से जुड़ी है। इसके अलग-अलग संस्करणों की क्षमताएं अलग हैं और इसकी रेंज भी संस्करण तथा संचालन संबंधी परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा SU-30 MKI

ब्रह्मोस से लैस SU-30 MKI को ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना गया। इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।

इस अभियान में भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता और स्वदेशी तथा भारतीय प्रणालियों के इस्तेमाल की चर्चा प्रमुखता से हुई थी। ब्रह्मोस और SU-30 MKI का संयोजन इसी तरह की लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता का उदाहरण माना जाता है।

वायुसेना दिवस पर दिखी कई प्रणालियों की ताकत

हिंडन एयरबेस पर पूर्वाभ्यास के दौरान केवल SU-30 MKI और ब्रह्मोस ही नहीं, बल्कि राफेल, तेजस और अन्य विमान तथा मिसाइल प्रणालियां भी शामिल रहीं। आकाश जैसी वायु रक्षा प्रणाली ने भी भारतीय वायुसेना की बहुस्तरीय क्षमता को प्रदर्शित किया।

वायुसेना दिवस के अवसर पर होने वाले ऐसे प्रदर्शन का उद्देश्य सैन्य क्षमताओं के साथ-साथ तैयारियों और विभिन्न हथियार प्रणालियों के बीच तालमेल को सामने लाना होता है।

आधुनिक युद्ध क्षमता की झलक

ब्रह्मोस से लैस SU-30 MKI की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारतीय वायुसेना लगातार अपने पुराने प्लेटफॉर्म को आधुनिक हथियारों और तकनीकों के साथ एकीकृत कर रही है। इससे लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, मिशन फ्लेक्सिबिलिटी और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूती मिलती है।

हिंडन एयरबेस पर हुए पूर्वाभ्यास में दिखाई गई यह क्षमता भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल की भी झलक पेश करती है।

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