9 Oct 2026, Fri

3 घंटे में निवेशकों के डूब गए ₹8 लाख करोड़, सेंसेक्स 800 अंक टूटा; शेयर बाजार में अचानक क्यों मची भगदड़?

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के शुरुआती घंटों में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स 800 से ज्यादा अंक टूटकर 71,800 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 50 में भी 300 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। अचानक आई इस बड़ी गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई। बिकवाली के दबाव के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।

बाजार में गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारणों का असर माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के सख्त रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया।

RBI के फैसले से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता

बाजार में गिरावट का एक प्रमुख कारण रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति भी रही। केंद्रीय बैंक ने करीब तीन साल के अंतराल के बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही मौद्रिक नीति के रुख में भी बदलाव किया गया है।

रेपो रेट बढ़ने से बैंकिंग सिस्टम में ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने और उपभोक्ताओं की उधारी लागत बढ़ने की आशंका रहती है। निवेशकों को चिंता है कि अगर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाते हैं तो आर्थिक गतिविधियों और कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को राहत नहीं मिली। अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। 30 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.71 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई, जबकि 10 साल की यील्ड करीब 5.3 प्रतिशत और दो साल की यील्ड लगभग 4.9 प्रतिशत रही।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की आकर्षकता बढ़ सकती है। ऐसे में वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।

कच्चा तेल 102 डॉलर के पार

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।

तेल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवहन, उत्पादन और अन्य क्षेत्रों की लागत भी बढ़ सकती है। इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ती है और शेयर बाजार के निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित होता है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी गिरावट की बड़ी वजह बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की।

लगातार नौ कारोबारी सत्रों में उनकी कुल बिकवाली करीब 57,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। सितंबर की शुरुआत से 25 में से 20 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक नेट सेलर रहे हैं।

ऐसे में एक तरफ वैश्विक बाजारों का दबाव है तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। इन सभी कारकों के एक साथ असर से गुरुवार को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजर अब आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।

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