बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) से जुड़े नेताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर राज्य की कांग्रेस सरकार पर SIR प्रक्रिया में कथित रूप से अनुचित हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। नेताओं ने इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप करने और आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों की जांच करना और योग्य मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। नेताओं का दावा है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराना कानून के तहत प्राप्त अधिकार है। इसके तहत आपत्तियों की जांच संबंधित चुनाव अधिकारियों द्वारा की जाती है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका निपटारा किया जाता है।
आपत्ति दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई का आरोप
BJP और JDS नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान आपत्तियां दर्ज कराने वाले कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इससे आम लोगों में डर और दबाव का माहौल बन रहा है तथा लोग मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियां दर्ज कराने से पीछे हट सकते हैं।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार से जुड़े लोग और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता SIR की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा गलत या फर्जी आपत्ति दर्ज की जाती है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन इसके नाम पर वास्तविक आपत्ति दर्ज कराने वाले लोगों को डराना उचित नहीं है।
छह FIR का किया गया जिक्र
ज्ञापन में छह FIR का भी उल्लेख किया गया है। इनमें भाल्की, मार्केट एरिया, व्यालिकवल, बल्लारी और नरसिंहराजा जैसे क्षेत्रों में दर्ज मामलों का जिक्र किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन मामलों में SIR प्रक्रिया से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया और पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
BJP-JDS नेताओं ने राज्यपाल से मांग की है कि इन मामलों की निष्पक्षता से जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ झूठे या गलत तरीके से आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं तो उन्हें रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
ज्ञापन में कहा गया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। किसी भी राजनीतिक दल या सरकार की ओर से इस प्रक्रिया पर दबाव या प्रभाव डालने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं होगी।
नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के कारण लोगों में भय पैदा हो रहा है, जिसका सीधा असर मतदाता सूची से जुड़ी आपत्तियों और सत्यापन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप कर आपत्ति दर्ज कराने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना है कि SIR की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है, इसलिए इसे बिना किसी राजनीतिक दबाव के पूरा किया जाना चाहिए।
कर्नाटक में SIR को लेकर बढ़ता राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। एक तरफ विपक्षी दल सरकार पर प्रक्रिया में हस्तक्षेप और पुलिस के कथित दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, वहीं इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

