अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच बड़ा कदम उठाया गया है। सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह ने अपने आपातकालीन भंडार से करीब 10 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद जारी करने पर सहमति जताई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति का दबाव कम करना और डीजल समेत अन्य ईंधनों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की कीमतों में तेजी का असर अमेरिका और यूरोप समेत कई बाजारों पर पड़ा है। खास तौर पर डीजल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ परिवहन और उद्योगों पर भी लागत का दबाव बढ़ा है।
चार महीने में जारी होगा तेल भंडार
योजना के तहत करीब 10 करोड़ बैरल तेल और अन्य ईंधन भंडार को चार महीने की अवधि में बाजार में लाया जाएगा। इसमें डीजल की आपूर्ति को शुरुआती चरण में प्राथमिकता दी जाएगी। पहले 20 दिनों के दौरान बड़ी मात्रा में डीजल बाजार में उतारने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी इस समन्वित प्रक्रिया की निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर आगे अतिरिक्त डीजल जारी करने पर भी चर्चा की जा सकती है।
समूह के देशों ने ऊर्जा और ऊर्जा उत्पादों के आपसी निर्यात पर नए प्रतिबंध नहीं लगाने की प्रतिबद्धता भी जताई है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और आपूर्ति से जुड़े दबाव को और बढ़ने से रोकना है।
अमेरिका में ईंधन कीमतों का दबाव
अमेरिका में डीजल की कीमतों में हाल के दिनों में काफी वृद्धि हुई है। महंगे ईंधन का असर परिवहन, कृषि, विनिर्माण और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ाई है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई और ईंधन की कीमतें घरेलू राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दे बनी हुई हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों द्वारा डीजल भंडार जारी करने के फैसले का स्वागत किया है। इससे पहले अमेरिका की ओर से ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए यूरोप से रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने की मांग की गई थी। अब आपातकालीन भंडार से ईंधन जारी करने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर
मध्य पूर्व में संघर्ष और तेल आपूर्ति मार्गों से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। खास तौर पर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल की आवाजाही को लेकर चिंता रही है। ऐसे में रणनीतिक भंडार से तेल और डीजल जारी करने का फैसला बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, इस कदम का ईंधन कीमतों पर कितना और कितने समय तक असर पड़ेगा, यह वैश्विक आपूर्ति, मांग और मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगा। संबंधित देशों ने स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कदम उठाने की बात कही है।

