अक्टूबर की शुरुआत के साथ पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़ा अहम बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सरकार की ओर से यह बदलाव किया गया है।
हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल पर पहले की तरह ही शुल्क लागू रहेगा।
डीजल पर ₹4 प्रति लीटर की कटौती
नई दरों के तहत डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और सेस को घटाया गया है। पहले डीजल के निर्यात पर यह शुल्क ₹20 प्रति लीटर था, जिसे अब घटाकर ₹16 प्रति लीटर कर दिया गया है।
इस तरह डीजल के एक्सपोर्ट पर कंपनियों को सीधे ₹4 प्रति लीटर की राहत मिली है। यह बदलाव पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शुल्क में कमी से निर्यात लागत पर असर पड़ेगा।
ATF पर भी कम हुआ विंडफॉल टैक्स
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर भी टैक्स कम किया गया है। पहले ATF के निर्यात पर ₹15 प्रति लीटर की दर से विंडफॉल टैक्स लगाया जा रहा था।
अब इसे घटाकर ₹10.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी ATF के एक्सपोर्ट पर ₹4.5 प्रति लीटर की कमी की गई है। नई दरें अगले पखवाड़े के लिए लागू रहेंगी और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार दरों में दोबारा बदलाव किया जा सकता है।
पेट्रोल पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी पहले की तरह ₹0.5 यानी 50 पैसे प्रति लीटर बनी हुई है।
इसका मतलब है कि 1 अक्टूबर से पेट्रोल के एक्सपोर्ट शुल्क में किसी तरह की अतिरिक्त राहत नहीं दी गई है, जबकि डीजल और ATF के मामले में दरों को कम किया गया है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?
विंडफॉल टैक्स में कटौती का सीधा संबंध पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से है। घरेलू बाजार में आम उपभोक्ताओं के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क या टैक्स दरों में इस बदलाव के साथ कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
इसलिए इस कटौती का घरेलू पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधे तौर पर कोई नकारात्मक असर नहीं बताया गया है।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स का इस्तेमाल तब किया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अचानक असाधारण लाभ मिलने की स्थिति बनती है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर सरकार समय-समय पर इस शुल्क की समीक्षा करती है।
1 अक्टूबर से डीजल और ATF पर शुल्क घटने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली कंपनियों की लागत और लाभ पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

