30 Sep 2026, Wed

भारत ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को दे दिया सीधा जवाब, कहा- ‘कश्मीर मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं’

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर भारत और तुर्की के बीच एक बार फिर बयानबाजी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अपने संबोधन के दौरान कश्मीर का जिक्र किया था। इसके बाद भारत ने उनकी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से संबंधित है और इस पर किसी बाहरी पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र में एर्दोगन ने क्या कहा?

22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने दक्षिण एशिया के विवादों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर समेत क्षेत्र के सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। उनका यह बयान संयुक्त राष्ट्र के मंच से दिया गया, जहां दुनिया के विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं।

कश्मीर को लेकर एर्दोगन पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में टिप्पणी कर चुके हैं। पिछले साल भी उन्होंने इस मुद्दे के समाधान की जरूरत पर जोर दिया था। इस बार उनके बयान के बाद भारत ने एक बार फिर तीसरे पक्ष की भूमिका को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

भारत ने क्या जवाब दिया?

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एर्दोगन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति की ओर से जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में की गई टिप्पणियों को अनुचित मानता है।

भारत ने स्पष्ट किया कि यह मामला देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र या मान्य भूमिका नहीं है।

‘लॉकस स्टैंडी’ का अर्थ किसी मामले में कानूनी या मान्य रूप से हस्तक्षेप करने का अधिकार होता है। भारत के बयान में इसी शब्द के जरिए यह स्पष्ट किया गया कि वह जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले में किसी बाहरी पक्ष की भूमिका को स्वीकार नहीं करता।

भारत की स्थिति पहले से स्पष्ट

जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत लंबे समय से अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है कि इस विषय पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। तुर्की की ओर से संयुक्त राष्ट्र के मंच पर कश्मीर का उल्लेख किए जाने के बाद नई दिल्ली ने इसी रुख को दोहराया है।

भारत की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है और विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय विवादों पर अपनी राय रख रहे हैं। इस दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आया।

पहले भी सामने आ चुका है ऐसा रुख

कश्मीर को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति की टिप्पणियां पहली बार चर्चा में नहीं आई हैं। इससे पहले भी वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से इस मुद्दे पर बयान दे चुके हैं। हर बार भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

इस बार भी भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा विषय उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से संबंधित है। विदेश मंत्रालय के बयान के बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख एक बार फिर सामने आ गया है।

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