टाटा ग्रुप के नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को मुंबई में हुई बैठक में एन. चंद्रशेखरन को लगातार दूसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही टाटा ग्रुप की कमान अगले पांच साल तक भी चंद्रशेखरन के हाथों में रहने का रास्ता साफ हो गया है।
एन. चंद्रशेखरन साल 2017 से टाटा संस के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके नए कार्यकाल को बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद उनके नेतृत्व में ग्रुप का कामकाज आगे भी जारी रहेगा।
2017 में संभाली थी जिम्मेदारी
एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में रतन टाटा के बाद टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। इसके बाद साल 2022 में उन्हें दूसरी बार पांच साल के कार्यकाल के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया था। अब बोर्ड ने उन्हें एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त करने की मंजूरी दी है।
हालांकि, इस फैसले से पहले चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर स्थिति अलग नजर आ रही थी। अगस्त में उन्होंने बोर्ड को बताया था कि वह चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। इसके बाद नए चेयरमैन की तलाश शुरू होने की चर्चा सामने आई थी। लेकिन अब बोर्ड के ताजा फैसले से नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भी अहम
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के बीच टाटा संस की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के तौर पर वर्गीकृत किया था। इसके तहत कंपनी के लिए तय समयसीमा में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की आवश्यकता थी।
टाटा संस ने इस नियम से बाहर निकलने के लिए अपना एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। हालांकि, 11 सितंबर को रिजर्व बैंक ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इसके बाद कंपनी की संभावित लिस्टिंग और आईपीओ को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं।
बड़े आईपीओ की संभावना से जुड़ा मामला
टाटा संस की लिस्टिंग होने पर इसे भारत के बड़े आईपीओ में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसकी वजह यह है कि टाटा संस की टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टीसीएस और इंडियन होटल्स समेत ग्रुप की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनी की संभावित लिस्टिंग का आकार काफी बड़ा हो सकता है।
कुछ सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड के कुछ सदस्यों का मानना है कि संभावित आईपीओ के समय नेतृत्व में निरंतरता निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत हो सकती है।
बोर्ड में हुआ मतदान
सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। हालांकि, बहुमत के समर्थन से प्रस्ताव पारित हो गया। बोर्ड के फैसले के बाद अब चंद्रशेखरन अगले पांच साल तक टाटा संस के चेयरमैन पद पर बने रहेंगे और ग्रुप के कारोबार से जुड़े बड़े फैसलों में उनकी भूमिका जारी रहेगी।

