17 Sep 2026, Thu

चांद पर 2 साल पहले आखिर क्या हुआ था? 728 फीट का गड्ढा देखकर वैज्ञानिकों के उड़े होश

चांद की सतह को लेकर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। वैज्ञानिकों को चांद पर एक विशाल नया इंपैक्ट क्रेटर मिला है, जो करीब 728 फीट चौड़ा और 141 फीट तक गहरा है। खास बात यह है कि यह गड्ढा लगभग दो साल पहले हुई एक शक्तिशाली टक्कर के कारण बना था, लेकिन उस समय वैज्ञानिकों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी थी। इसे हाल के समय में खोजे गए सबसे बड़े ज्ञात इंपैक्ट क्रेटरों में से एक बताया जा रहा है।

यह खोज चांद की सतह पर होने वाली टक्करों और उनके प्रभाव को समझने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इतनी बड़ी टक्कर की घटना बेहद दुर्लभ होती है और औसतन करीब 132 साल में एक बार होने की संभावना रहती है।

728 फीट चौड़ा और 141 फीट गहरा है क्रेटर

वैज्ञानिकों के अनुसार यह विशाल गड्ढा करीब 728 फीट यानी लगभग 222 मीटर चौड़ा है। इसकी गहराई करीब 141 फीट यानी लगभग 43 मीटर तक है। इसे चांद के उस हिस्से में खोजा गया है, जो पृथ्वी से दिखाई देता है।

इस क्रेटर को किसी क्षुद्रग्रह या धूमकेतु के टूटे हुए हिस्से के चांद की सतह से टकराने के बाद बने होने की संभावना जताई गई है। चांद की सतह पर ऐसी टक्करों के निशान पहले भी मिले हैं, लेकिन इस नए क्रेटर का आकार वैज्ञानिकों के लिए खास है।

इसका नाम दिवंगत वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के नाम पर रखा गया है। वह ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लेनेटरी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक रह चुके थे। बताया गया है कि इससे पहले लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर द्वारा खोजा गया एक रिकॉर्ड क्रेटर इसके मुकाबले करीब तीन गुना छोटा था।

100 किलोमीटर से ज्यादा इलाके पर पड़ा असर

वैज्ञानिकों के मुताबिक इस टक्कर का असर केवल उस जगह तक सीमित नहीं रहा, जहां क्रेटर बना। टक्कर की ताकत इतनी ज्यादा थी कि चांद की सतह का 100 किलोमीटर से ज्यादा बड़ा इलाका इससे प्रभावित हुआ।

टक्कर के दौरान धूल और चट्टानी मिट्टी काफी दूर तक उछली। वैज्ञानिकों ने पाया कि मलबा अनुमान से कहीं ज्यादा ऊंचे कोण पर दूर तक पहुंचा था। इससे उन्हें टक्कर की ताकत और उसके बाद सतह पर हुए बदलावों को समझने में मदद मिली।

मई 2024 में मिली थी जानकारी

इस क्रेटर को मई 2024 में चांद की सतह की तस्वीरों का अध्ययन करते समय लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर ने देखा था। वैज्ञानिकों के मुताबिक टक्कर इससे पहले हो चुकी थी, लेकिन उसके निशान की पहचान बाद में हुई।

इस खोज ने वैज्ञानिकों को चांद पर होने वाली ऐसी घटनाओं को बेहतर तरीके से समझने का मौका दिया है। साथ ही भविष्य में चांद पर बनने वाले मानव बेस और वहां होने वाली गतिविधियों के लिए भी ऐसी घटनाओं को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है। चांद की सतह पर क्षुद्रग्रहों और अन्य अंतरिक्षीय पिंडों की टक्कर से होने वाले प्रभावों की जानकारी भविष्य के मिशनों की योजना बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।

वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि इतनी बड़ी टक्कर के बाद बने क्रेटर को उसके शुरुआती दौर में पहचानना चांद की सतह में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर देता है।

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