16 Sep 2026, Wed

कौन हैं CBI अफसर सीमा पाहुजा? करेंगी दिशा सालियान डेथ केस की जांच, हाथरस कांड-RG कर केस को भी सुलझाया

मुंबई: दिशा सालियान की मौत का मामला करीब छह साल बाद एक बार फिर जांच के केंद्र में है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच शुरू कर दी है। अब इस संवेदनशील मामले की निगरानी की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारी सीमा पाहूजा को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सीमा पाहूजा इससे पहले भी कई चर्चित और संवेदनशील आपराधिक मामलों की जांच से जुड़ी रही हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय एजेंसी को दिशा सालियान की मौत की जांच सौंपी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए और जांच के दौरान सामने आने वाले ठोस तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

कौन हैं सीमा पाहूजा?

सीमा पाहूजा वर्तमान में दिल्ली स्थित केंद्रीय जांच एजेंसी के विशेष अपराध प्रकोष्ठ में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात बताई जाती हैं। इससे पहले वह चंडीगढ़ यूनिट में भी काम कर चुकी हैं। उनके करियर में कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों की जांच शामिल रही है।

सीमा पाहूजा का नाम हाथरस मामले और कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़े मामले की जांच से भी जुड़ा रहा है। इसके अलावा उन्होंने उन्नाव और शिमला के चर्चित गुड़िया मामले की जांच में भी काम किया है। ऐसे मामलों में जांच के दौरान घटनास्थल, गवाहों, दस्तावेजों और फोरेंसिक साक्ष्यों को जोड़कर आगे बढ़ना उनकी भूमिका का हिस्सा रहा है।

दिशा सालियान मामले में अब क्या होगा?

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 की रात हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामले को लेकर अलग-अलग सवाल और दावे सामने आते रहे। अब केंद्रीय एजेंसी ने नए सिरे से जांच शुरू की है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुराने रिकॉर्ड, पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज, घटनास्थल से संबंधित सामग्री और उपलब्ध फोरेंसिक रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।

जांच के दौरान उन लोगों के बयान भी दर्ज किए जाने हैं, जो घटना से पहले दिशा के संपर्क में थे या उस रात हुई पार्टी में मौजूद बताए जाते हैं। इसके अलावा उस समय की पुलिस कार्रवाई और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को भी नए सिरे से देखा जा सकता है।

छह साल पुराने मामले में बड़ी चुनौती

इतने लंबे समय बाद जांच शुरू होने के कारण सबसे बड़ी चुनौती पुराने सबूतों और गवाहों से जुड़ी जानकारी को दोबारा जुटाना होगी। समय बीतने के साथ कई रिकॉर्ड, डिजिटल सामग्री और घटनाक्रम से जुड़ी यादों की जांच करना आसान नहीं होता। ऐसे में जांच एजेंसी को उपलब्ध दस्तावेजों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम को दोबारा समझने की कोशिश करनी होगी।

अदालत ने भी स्पष्ट किया है कि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका केवल पर्याप्त सामग्री सामने आने के बाद ही तय की जानी चाहिए।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सीमा पाहूजा की निगरानी में होने वाली जांच पुराने मामले से जुड़े किन तथ्यों और साक्ष्यों तक पहुंचती है और जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी से दिशा सालियान की मौत की परिस्थितियों को लेकर क्या तस्वीर स्पष्ट होती है।

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