बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मौजूदा स्थिति और उसमें हो रहे बदलाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत तीन अलग-अलग चरणों में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त फंड्स की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नकदी प्रबंधन को संतुलित बनाए रखना है।
केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस बिक्री की शुरुआत 17 सितंबर से होगी। पहले चरण में 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेची जाएंगी। इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की बिक्री होगी। इस तरह तीनों चरणों में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में बिक्री के लिए रखी जाएंगी।
पहली नीलामी में शामिल होंगी छह सरकारी प्रतिभूतियां
17 सितंबर को होने वाली पहली नीलामी में कुल छह सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होंगी। इनकी मैच्योरिटी अवधि वर्ष 2029 से लेकर 2032 के बीच है।
पहली नीलामी में 7.59 प्रतिशत जीएस 2029, 6.79 प्रतिशत जीएस 2029, 7.61 प्रतिशत जीएस 2030, 5.77 प्रतिशत जीएस 2030, 6.68 प्रतिशत जीएस 2031 और 8.28 प्रतिशत जीएस 2032 शामिल होंगी।
नीलामी 17 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे के बीच आयोजित की जाएगी। इसमें भाग लेने वाले पात्र प्रतिभागियों को निर्धारित समय के दौरान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपनी बोलियां जमा करनी होंगी।
E-Kuber के जरिए जमा होंगी बोलियां
नीलामी में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को केंद्रीय बैंक के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन E-Kuber के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी बोलियां जमा करनी होंगी। इसके लिए 17 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।
नीलामी के परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे। सफल प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि खरीदी गई सरकारी प्रतिभूतियां 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक उनके संबंधित सब्सिडियरी जनरल लेजर यानी SGL खाते में उपलब्ध हों।
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी है नकदी
केंद्रीय बैंक का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध नकदी में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है। विदेशी मुद्रा से जुड़े एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए देश में बड़ी मात्रा में फंड आने से बैंकों के पास उपलब्ध धनराशि बढ़ी है।
बैंकों में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने और मौद्रिक व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए केंद्रीय बैंक पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) जैसी नीलामियों का इस्तेमाल कर रहा है।
सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के जरिए बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को वापस खींचने में मदद मिल सकती है। इससे वित्तीय बाजार में नकदी की उपलब्धता को व्यवस्थित रखने और ब्याज दरों तथा तरलता प्रबंधन को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में इन नीलामियों के परिणामों पर बाजार की नजर रहेगी। तीन चरणों में होने वाली इस बिक्री से बैंकिंग सिस्टम की नकदी स्थिति पर भी असर पड़ने की संभावना है।

