7 Sep 2026, Mon

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, एमसीडी और दिल्ली सरकार को नोटिस, कहा-जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते

नई दिल्ली: राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में हुए बिल्डिंग हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार और नगर निगम को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। कोर्ट ने हादसे को बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं। अदालत ने राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने तथा मलबे में फंसे लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव कदम उठाने पर जोर दिया।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि हादसे वाली इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। कोर्ट ने कहा कि कई छात्रों की जिंदगी खतरे में है और ऐसी स्थिति से ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता। अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राहत और बचाव कार्य के लिए सभी जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और प्राथमिकता लोगों की जान बचाना होना चाहिए।

सरकारी विभाग भी नहीं बच सकते जिम्मेदारी से

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी साफ किया कि किसी इमारत के गिरने की जिम्मेदारी केवल उसके मालिक पर डालकर सरकारी विभाग अपनी भूमिका से बच नहीं सकते। अदालत के मुताबिक संबंधित अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे निर्माण नियमों का पालन सुनिश्चित करें और खतरनाक या नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर समय रहते कार्रवाई करें।

कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित विभाग अपने कानूनी दायित्वों को सही तरीके से निभाएं और समय रहते अवैध निर्माण पर नजर रखें, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पीजी और हॉस्टल व्यवस्था पर भी सवाल

अदालत ने दिल्ली में पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। राजधानी में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जो पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आते हैं। पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें अक्सर निजी पीजी या किराये के मकानों में रहना पड़ता है।

कोर्ट ने कहा कि छात्रों के रहने वाले इन स्थानों पर सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों की निगरानी बेहद जरूरी है। यदि किसी भवन को सीमित मंजिलों के निर्माण की अनुमति दी गई है तो उसके ऊपर नियमों के खिलाफ अतिरिक्त मंजिलें खड़ी करना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

अवैध निर्माण पर निगरानी जरूरी

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी में कई जगहों पर भवनों में जरूरत से ज्यादा निर्माण किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में संबंधित विभागों की नियमित जांच और समय पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है।

सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि छात्रों और किरायेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को कितनी प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनानी चाहिए। अदालत की सख्ती के बाद अब मामले में सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *