नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV का बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि वर्ष 2030 तक देश का इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार करीब ₹20 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में करीब 5 करोड़ रोजगार पैदा होने की क्षमता है। अगर यह अनुमान साकार होता है तो इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए एक बड़ा आधार बन सकता है।
गडकरी ने यह बात CII-ITC सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मौजूदा स्थिति और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।
देश में 57 लाख से ज्यादा EV रजिस्टर्ड
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, भारत में इस समय करीब 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं। देश में कुल वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 7 फीसदी है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है।
EV की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कार और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इलेक्ट्रिक बसों की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर
नितिन गडकरी ने इलेक्ट्रिक बसों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में हर साल करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में भारत की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 50 से 60 हजार इलेक्ट्रिक बसों की है।
इसका मतलब है कि मांग और उत्पादन क्षमता के बीच अभी बड़ा अंतर मौजूद है। अगर देश में EV अपनाने की रफ्तार इसी तरह बढ़ती है तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के निर्माण में बड़े निवेश और नई उत्पादन इकाइयों की जरूरत पड़ सकती है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को दुनिया में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य
गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग को दुनिया का नंबर-1 ऑटो सेक्टर बनाना है। उन्होंने माना कि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसे हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध है। इसके अलावा देश में बनने वाली गाड़ियों की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और उनकी लागत भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी है। ऐसे में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के पास वैश्विक स्तर पर विस्तार करने की काफी संभावनाएं हैं।
₹14 लाख करोड़ से बढ़कर ₹22-23 लाख करोड़ हुआ बाजार
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के बढ़ते आकार का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का पद संभाला था, उस समय देश के ऑटोमोबाइल उद्योग का कुल आकार करीब ₹14 लाख करोड़ था। अब यह बढ़कर लगभग ₹22-23 लाख करोड़ हो चुका है।
गडकरी ने तुलना करते हुए बताया कि अमेरिका का ऑटोमोबाइल सेक्टर करीब ₹78 लाख करोड़ और चीन का लगभग ₹47 लाख करोड़ का है। ऐसे में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बनाने के लक्ष्य के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
EV सेक्टर से रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
अगर 2030 तक EV बाजार ₹20 लाख करोड़ तक पहुंचता है तो इसका फायदा केवल वाहन बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। बैटरी निर्माण, चार्जिंग स्टेशन, वाहन निर्माण, सर्विसिंग, सॉफ्टवेयर, रिसर्च और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
नितिन गडकरी के 5 करोड़ नौकरियों के अनुमान ने इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर को भारत के भविष्य के बड़े रोजगार और आर्थिक विकास के संभावित इंजन के रूप में सामने रखा है।

