कोलंबो। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक लगाकर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया। जुरेल ने 177 गेंदों पर नाबाद 115 रन की पारी खेली और भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, उनकी इस पारी की खासियत सिर्फ शतक नहीं थी। शतक पूरा करने के बाद जुरेल ने अपनी बांह पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ का टैटू दिखाते हुए पिता को सलाम किया। उनके इस जश्न के पीछे उनके परिवार और जड़ों से जुड़ी एक बेहद भावुक कहानी है।
जुरेल ने बताया कि यह टैटू उनके लिए महज एक डिजाइन नहीं बल्कि उनके परिवार की पहचान और संघर्ष की याद है। उनके पिता भारतीय सेना में रह चुके हैं, जबकि उनके दादा किसान थे। इसलिए उन्होंने अपने हाथ पर ‘जय जवान, जय किसान’ लिखवाया है।
पिता ने कारगिल युद्ध में दी थी सेवा
ध्रुव जुरेल के पिता नेम चंद भारतीय सेना में रह चुके हैं। उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी देश की सेवा की थी। वहीं, जुरेल के दादा किसान थे। जुरेल के मुताबिक, उनके परिवार की असली जड़ें एक तरफ देश की सेवा करने वाले जवान और दूसरी तरफ खेती करने वाले किसान से जुड़ी हैं।
इसी वजह से शतक के बाद उनका सलाम उनके पिता और दादा दोनों को समर्पित था। जुरेल ने कहा कि वह अपनी इन जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहते। उनके लिए ‘जय जवान, जय किसान’ सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि उनके परिवार की कहानी और उनकी पहचान का हिस्सा है।
गौरतलब है कि ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 में दिया था। यह नारा देश की सुरक्षा में जवानों और देश की अर्थव्यवस्था व खाद्य व्यवस्था में किसानों के योगदान को सम्मान देता है।
दबाव के बीच आया शानदार शतक
ध्रुव जुरेल का यह शतक ऐसे समय आया, जब भारतीय टीम में उनकी जगह को लेकर सवाल उठ रहे थे। जुरेल ने मौके का पूरा फायदा उठाते हुए शानदार बल्लेबाजी की और 115 रन की नाबाद पारी खेली। उनकी पारी की बदौलत भारत ने 503/9 के स्कोर पर अपनी पारी घोषित की।
यह जुरेल के टेस्ट करियर का दूसरा शतक है। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य और परिस्थिति के मुताबिक खेलने की क्षमता नजर आई। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने जिस तरह अपनी भावनाएं जाहिर कीं, उसने इस उपलब्धि को और खास बना दिया।
ऋषभ पंत से लेते हैं बल्लेबाजी की सलाह
जुरेल को भारतीय टीम में अक्सर ऋषभ पंत के बैकअप विकेटकीपर के तौर पर देखा जाता है। पंत के साथ खेलने और उनसे सीखने को लेकर जुरेल ने कहा कि वह अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज से सलाह लेना पसंद करते हैं।
उन्होंने माना कि पंत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया है और उनके पास काफी अनुभव है। हालांकि, जुरेल ने साफ किया कि वह पंत की बल्लेबाजी शैली की नकल करने की कोशिश नहीं करते।
उनका मानना है कि टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती खिलाड़ियों की अलग-अलग शैली में है। जुरेल गेंदबाज और परिस्थितियों को पढ़कर तय करते हैं कि किस गेंदबाज पर दबाव बनाना है और किस स्पेल को सावधानी से खेलना है।
श्रीलंका के खिलाफ लगाया गया यह शतक जुरेल के लिए क्रिकेट उपलब्धि के साथ-साथ अपने परिवार की जड़ों और पिता-दादा के योगदान को सम्मान देने का भी खास मौका बन गया।

