बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एकलव्य आदर्श विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने अपनी समस्याओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सेंधवा के जामली स्थित एकलव्य आदर्श विद्यालय के बच्चे अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह से मिलने के लिए पैदल रवाना हो गए। छात्रों का आरोप है कि स्कूल में उन्हें जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। इसके अलावा कुछ छात्रों ने जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया है।
17 किलोमीटर पैदल चल चुके छात्र
छात्र-छात्राएं सुबह करीब 7 बजे विद्यालय से पैदल निकले थे। देखते ही देखते उनका यह मार्च करीब 15 से 17 किलोमीटर तक पहुंच गया। बच्चों का कहना है कि वे अपनी बात सीधे कलेक्टर के सामने रखना चाहते हैं और कलेक्टर से मुलाकात किए बिना वापस नहीं लौटेंगे।
छात्रों के मुताबिक, वे लंबे समय से स्कूल से जुड़ी समस्याओं को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि विद्यालय में कई जरूरी सुविधाओं का अभाव है। इसी के साथ उन्होंने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाया
छात्रों के पैदल मार्च की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ। सेंधवा एसडीएम, बड़वानी के एडिशनल एसपी और पुलिस अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत कर उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सेंधवा, जुलवानिया और नांगलवाड़ी थानों से पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार बच्चों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुंची
लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने के कारण बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। सेंधवा एसडीएम आशीष के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बच्चों की स्थिति पर नजर रख रही है, ताकि किसी छात्र की तबीयत खराब होने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।
कलेक्टर से मुलाकात की मांग
छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं और इसी उद्देश्य से कलेक्टर से मिलने जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना जाता, तब तक वे वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हैं।
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी बच्चों को समझाने और उनकी समस्याएं सुनने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं छात्र कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग पर कायम हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन छात्रों की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और उनकी कलेक्टर से मुलाकात कब होती है।

