तमिलनाडु की राजनीति में भ्रष्टाचार से जुड़ी कथित फाइलों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विधानसभा में हुई बहस के दौरान विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के उस बयान पर सवाल उठाए गए, जिसमें उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़ी कथित भ्रष्टाचार की फाइलों को सही समय पर सार्वजनिक करने की बात कही थी। विपक्ष ने मांग की कि यदि सरकार के पास भ्रष्टाचार के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें तुरंत सामने लाया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विधानसभा में बहस के दौरान विपक्ष के नेता ने मुख्यमंत्री के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए है और यहां फिल्मी अंदाज में संवाद बोलने के बजाय ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि यदि उनके पास पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़ी भ्रष्टाचार की फाइलें मौजूद हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
तुरंत फाइलें सार्वजनिक करने की मांग
विपक्षी नेता ने सवाल उठाया कि सरकार कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलों को सामने लाने में देरी क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर दस्तावेजों में भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मौजूद हैं, तो सरकार को उन्हें सार्वजनिक कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को फाइलें खोलने के लिए किसी खास समय या तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दे को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार ने किया मुख्यमंत्री का बचाव
विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार की ओर से मुख्यमंत्री के रुख का बचाव किया गया। सरकार की तरफ से कहा गया कि मुख्यमंत्री पारदर्शिता के पक्ष में हैं और कथित भ्रष्टाचार से संबंधित दस्तावेज उचित समय पर सामने रखे जाएंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों की जांच और उनसे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आया और उसने फाइलें जल्द सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
पहले भी हो चुकी है तीखी बहस
भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज को लेकर विधानसभा में दोनों पक्षों के बीच पहले भी तीखी बहस देखने को मिली है। वित्तीय प्रबंधन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े कथित मामलों को लेकर सदन में आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
हालिया बहस के दौरान भी दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच नारेबाजी और तीखी बयानबाजी की स्थिति बनी। कुछ समय के लिए विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जिन फाइलों का जिक्र मुख्यमंत्री ने किया है, उन्हें कब सार्वजनिक किया जाता है और उनमें सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है।

