8 Aug 2026, Sat
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला, याचिका में की गई CBI या स्वतंत्र जांच कमेटी से इन्वेस्टिगेशन कराने की मांग

नई दिल्ली/रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरीशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर परीक्षा की CBI या किसी स्वतंत्र जांच समिति से निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

यह मामला JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है, जो 19 अप्रैल 2026 को आयोजित की गई थी। आयोग ने 2 जुलाई 2026 को परीक्षा का प्रारंभिक परिणाम घोषित किया था। परिणाम जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर एक सफल उम्मीदवार की कथित OMR शीट की कार्बन कॉपी वायरल होने की खबर सामने आई, जिसके बाद परीक्षा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

48 सवालों के जवाब देने के बावजूद सफलता का आरोप

याचिका में सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया है कि एक उम्मीदवार ने पेपर-I में 100 में से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए, लेकिन उसे परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया। इस दावे के सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर OMR शीट की तस्वीरें वायरल होने के बाद मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।

हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

CID कर रही है जांच

विवाद बढ़ने के बाद JPSC ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच CID को सौंपी गई है। आयोग ने सफल घोषित किए गए उम्मीदवारों से उनके पेपर-I और पेपर-II की OMR कार्बन कॉपी जमा करने को भी कहा था। इसके लिए 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक का समय निर्धारित किया गया था।

आयोग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, याचिकाकर्ता का तर्क है कि चूंकि मामला राज्य की एक प्रमुख प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि उम्मीदवारों का भरोसा बहाल हो सके।

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?

जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।

अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता

JPSC की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। ऐसे में कथित गड़बड़ी के आरोपों ने हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट के रुख और CID जांच की प्रगति पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि शीर्ष अदालत इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत होती है, तो परीक्षा विवाद को लेकर आगे महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं.

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