बेंगलुरु: कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कई विधायकों को मंत्री पद नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ गई है और कुछ नेताओं ने इस्तीफा देने तक की चेतावनी दी है। इस बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराज विधायकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी सर्वोपरि है और यदि कोई विधायक इस्तीफा देता है, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाएगा।
कर्नाटक मंत्रिमंडल के विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया है। इसके बाद मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई कांग्रेस विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की है, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
पार्टी पहले, पद बाद में: शिवकुमार
मंगलवार को मीडिया से बातचीत में डीके शिवकुमार ने कहा कि राजनीति में इस्तीफे कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं होता।
उन्होंने कहा, “अगर कोई इस्तीफा देना चाहता है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता। लेकिन अगर किसी को अपना राजनीतिक भविष्य और पार्टी दोनों चाहिए, तो उसे समझना होगा कि पार्टी सबसे महत्वपूर्ण है। पार्टी है, तभी बाकी सब कुछ है।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देता है, तो वह उसे “कुछ ही मिनटों में स्वीकार” कर लेंगे।
नाराज विधायकों से धैर्य रखने की अपील
डीके शिवकुमार ने असंतुष्ट विधायकों से धैर्य रखने और भविष्य के अवसरों का इंतजार करने को कहा। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार जल्द ही सरकारी बोर्डों और निगमों में नियुक्तियां करेगी, जहां योग्य विधायकों को जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीति में हर किसी को तुरंत पद नहीं मिलता और कई वरिष्ठ नेताओं ने लंबे समय तक इंतजार करने के बाद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
अपने अनुभव का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी कई बार मंत्री पद नहीं मिला था, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी।
उन्होंने कहा, “धर्म सिंह और सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे मंत्री नहीं बनाया गया था। क्या मैंने इस्तीफा दिया? हमने सब्र रखा। बाद में अवसर मिला। राजनीति में धैर्य बहुत जरूरी है।”
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व मुख्यमंत्री बंगारप्पा और धर्म सिंह जैसे नेताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कई बड़े नेताओं को भी शुरुआत में मंत्री पद नहीं मिला था, लेकिन बाद में उन्होंने महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिकाएं निभाईं।
कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ती नाराजगी कांग्रेस नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकती है। राज्य में पार्टी की सरकार है और ऐसे समय में विधायकों की असंतुष्टि विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा दे सकती है।
हालांकि पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि असंतुष्ट नेताओं को बातचीत के जरिए मनाया जाए और संगठन तथा सरकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों के साथ बैठक कर सकता है। यदि बोर्ड और निगमों में नियुक्तियां जल्द होती हैं, तो इससे कुछ हद तक नाराजगी कम हो सकती है।
फिलहाल डीके शिवकुमार के सख्त बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व पार्टी अनुशासन को लेकर कोई नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नाराज विधायक अपने रुख पर कायम रहते हैं या पार्टी नेतृत्व के साथ समझौते का रास्ता चुनते हैं।

