4 Aug 2026, Tue

राज्य सभा में पास हुआ MSME (Amendment) बिल, जानें ये क्या है और इसमें क्या संशोधन किए गए हैं

नई दिल्ली: राज्य सभा ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह विधेयक देश के एमएसएमई सेक्टर को मजबूत बनाने, छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने, फंसे हुए भुगतान की समस्या दूर करने और कारोबार को अधिक आसान बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। बिल पारित होने से पहले विपक्ष द्वारा पेश किए गए संशोधनों को भी सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

यह संशोधन एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 में बदलाव करेगा और उद्योगों के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू करेगा। सरकार का कहना है कि इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर राहत मिलेगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा रजिस्ट्रेशन

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एमएसएमई के मुफ्त और स्वैच्छिक रजिस्ट्रेशन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिसूचित किया जाएगा। इससे उद्यमों का पंजीकरण अधिक पारदर्शी, तेज और सरल हो सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से छोटे कारोबारियों को सरकारी योजनाओं और वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।

टर्नओवर सीमा बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि एमएसएमई की परिभाषा में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके तहत टर्नओवर की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे कई ऐसे उद्योग, जो पहले एमएसएमई की श्रेणी से बाहर हो जाते थे, अब इस श्रेणी में शामिल होकर सरकारी लाभ और सुविधाओं का फायदा उठा सकेंगे।

भुगतान की समस्या पर सरकार का फोकस

एमएसएमई सेक्टर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक भुगतान में देरी रही है। इसे ध्यान में रखते हुए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSEs) एमएसएमई इकाइयों से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के इनवॉइस का भुगतान TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म के माध्यम से करेंगे

इस व्यवस्था का उद्देश्य एमएसएमई इकाइयों की लिक्विडिटी यानी नकदी प्रवाह को बेहतर बनाना है, ताकि उन्हें भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

राज्यों के लिए भी प्रावधान

विधेयक में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि राज्य सरकारें अपने सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी इसी तरह की भुगतान व्यवस्था लागू कर सकेंगी। इससे देशभर में एमएसएमई भुगतान प्रणाली को अधिक प्रभावी और एक समान बनाने में मदद मिलेगी।

विवाद निपटारे की समयसीमा तय

बिल में भुगतान से जुड़े विवादों के समाधान के लिए समयसीमा तय करने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे छोटे उद्योगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी और कारोबारी माहौल बेहतर होगा।

सरकार ने बताए बिल के उद्देश्य

मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि 2014 के बाद एमएसएमई सेक्टर को दिए जाने वाले ऋण में कई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य मौजूदा चुनौतियों का समाधान, प्रशासनिक ढांचे में सुधार, व्यापारिक भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना और नियमों के अनुपालन को आसान बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन देश के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यदि डिजिटल रजिस्ट्रेशन, समयबद्ध भुगतान और TReDS जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो एमएसएमई सेक्टर को वित्तीय मजबूती और कारोबार विस्तार में बड़ा लाभ मिल सकता है।

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