नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत समेत अपने 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़ी जांच के आधार पर नए स्थायी टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। हालांकि, भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसे प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत की बजाय 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया है। भारत सरकार ने इसे दोनों देशों के बीच जारी संवाद और लगातार कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम बताया है।
वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का असर भारत के सभी निर्यात पर नहीं पड़ेगा। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका को होने वाले भारत के लगभग 45 प्रतिशत निर्यात इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे, जबकि शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा।
मंत्रालय ने कहा कि भारत के लिए यह फैसला कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाता है। अमेरिका ने जिन देशों की जांच की है, उनमें से कई पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि भारत को निचली श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक वार्ताओं का सकारात्मक परिणाम है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने फरवरी 2026 में सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाया था। यह अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने नई नीति के तहत स्थायी टैरिफ व्यवस्था की घोषणा की है, जिसमें देशों को उनके श्रम मानकों और व्यापारिक प्रतिबद्धताओं के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है।
वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर बातचीत लगातार जारी है। दोनों देश वस्त्र क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। भारत सरकार का कहना है कि वह इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के साथ रचनात्मक तरीके से काम कर रही है।
अमेरिका की नई टैरिफ नीति उन देशों पर लागू होगी जिन्होंने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए कानून बनाए हैं या अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत ऐसे कदम उठाने का वादा किया है। जिन देशों ने इस दिशा में आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन्हें भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया है।
भारत के अलावा इस श्रेणी में अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। वहीं, जिन देशों को इस श्रेणी में जगह नहीं मिली है, उन पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जेनरिक दवाओं पर भी सख्त रुख अपनाने की घोषणा की है। उनके अनुसार, अमेरिका में आयात होने वाली जेनरिक दवाओं पर फिलहाल दो वर्षों तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद अगस्त 2028 से इन दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा और अगले चरण में इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत तक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ, 12.5 प्रतिशत की तुलना में अपेक्षाकृत राहत देने वाला कदम है। हालांकि, जिन भारतीय उत्पादों पर यह शुल्क लागू होगा, उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति और आगे की वार्ताएं दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए बेहद अहम साबित होंगी।

