अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वें दिन ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करने का दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में ईरान के सैन्य संचालन केंद्रों, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं, विमान हैंगरों, समुद्री सैन्य ठिकानों और सैन्य रसद से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे सुरक्षा खतरों को कम करना है।
CENTCOM ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि यह सैन्य अभियान 21 जुलाई की रात सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अमेरिकी सेना के मुताबिक, हाल के महीनों में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई व्यावसायिक जहाजों पर हमले किए गए, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया था। अमेरिका का दावा है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय नौवहन को सुरक्षित बनाए रखना है।
अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों के दौरान ईरान ने 30 से अधिक व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। CENTCOM के अनुसार, इन घटनाओं ने सैकड़ों नागरिक नाविकों की सुरक्षा को खतरे में डाला और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर आवाजाही प्रभावित हुई। अमेरिका ने कहा कि मई की शुरुआत से अब तक उसकी नौसेना और सहयोगी बलों ने लगभग 900 व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराने में सहायता की है। इन जहाजों के जरिए करीब 45 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन किया गया।
दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया IRIB ने भी देश के कई हिस्सों में हमलों की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, इलाम प्रांत के चावर और अबदानान क्षेत्रों में हवाई हमले हुए, जबकि अबदानान के स्थानीय प्रशासन ने दीनारकोह इलाके को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी। इसके अलावा कुर्दिस्तान प्रांत के बनेह, हमदान प्रांत के कबूदर आहंग, खुजेस्तान प्रांत के माहशहर, पूर्वी अजरबैजान के तबरीज और दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार में भी धमाकों और हवाई गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं।
ईरानी अधिकारियों ने कई स्थानों पर विस्फोट और हवाई हमलों की पुष्टि की है, हालांकि नुकसान और संभावित हताहतों को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों की आवाजाही भी देखी गई, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति, शिपिंग उद्योग और वैश्विक बाजारों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
फिलहाल अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को समुद्री सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते इस टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों से स्थिति सामान्य होगी या सैन्य संघर्ष और तेज होगा।

