9 Jul 2026, Thu

दिल्ली में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अधिकारियों को लगाई फटकार

दिल्ली-एनसीआर में अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त नाराजगी जताई। हाल के दिनों में दिल्ली, लखनऊ और एनसीआर में आग लगने और इमारत गिरने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जिम्मेदार एजेंसियां हादसों के बाद केवल दिखावे की कार्रवाई करती हैं, जबकि उन अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती जिनकी निगरानी में नियमों का उल्लंघन होता है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अदालत को उम्मीद थी कि संबंधित अधिकारी खुद कार्रवाई करेंगे, लेकिन जमीन पर कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया। कोर्ट ने साफ किया कि अब ऐसे आदेश पारित किए जाएंगे जिनका असर कई लोगों पर पड़ेगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि लापरवाह अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड, लखनऊ के अलीगंज में आग की घटना और साकेत में इमारत गिरने जैसे मामलों का उल्लेख किया। कोर्ट ने मालवीय नगर के होटल में 3 जून को लगी आग का जिक्र किया, जिसमें 21 लोगों की मौत हुई थी। अदालत ने MCD के रवैये पर भी सवाल उठाए और पूछा कि इस हादसे के बाद दक्षिण दिल्ली के अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के साकेत, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर इलाकों में इमारतों की स्थिति और नियमों के पालन की जांच कराने का आदेश दिया है। इसके लिए एक विशेषज्ञ टीम बनाई जाएगी, जिसमें IIT दिल्ली के सिविल विभाग के दो वरिष्ठ प्रोफेसर, दो ड्राफ्ट्समैन, MCD अधिकारी और कोर्ट के एमिकस क्यूरी शामिल होंगे। यह टीम इन इलाकों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट अदालत में जमा करेगी।

कोर्ट ने लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र का भी सर्वे कराने का निर्देश दिया है, जहां 22 जून को एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी आग में 15 लोगों की मौत हुई थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें दावा किया गया कि 93 प्रतिशत इमारतें फायर सेफ्टी ऑडिट में फेल पाई गईं। अदालत ने दिल्ली, गुरुग्राम और लखनऊ के संबंधित निकायों के प्रमुखों को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।

इससे पहले भी अदालत अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर कड़ी टिप्पणी कर चुकी है। साकेत बिल्डिंग हादसे के मामले में कोर्ट के एमिकस क्यूरी ने बताया था कि MCD की बार-बार की निष्क्रियता और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई न होने के कारण इमारत गिरने जैसी घटना हुई, जिसमें लोगों की मौत हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नगरपालिका कानूनों का खुला उल्लंघन और संपत्तियों का अवैध इस्तेमाल गंभीर मामला है। अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि उसके 20 मई के आदेश के बाद क्या कार्रवाई की गई, क्योंकि उस आदेश में सुरक्षा नियमों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। अब अदालत के सख्त रुख के बाद दिल्ली-एनसीआर में अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

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