27 Jun 2026, Sat

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के महासमुंद जिले स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में हीरा खनन की संभावनाओं को लेकर अब गतिविधियां तेज हो गई हैं। नई दिल्ली में आयोजित एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की बैठक में इस परियोजना के अगले चरण को मंजूरी दे दी गई है। बोर्ड ने बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में लार्ज डायमीटर (बड़े व्यास) ड्रिलिंग शुरू करने का फैसला लिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह चरण क्षेत्र में मौजूद हीरा भंडार का सटीक वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन शुरू करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हीरा भंडार का होगा वैज्ञानिक आकलन

बैठक के दौरान एनसीएल बोर्ड ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की निर्धारित अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं।

बड़े व्यास की ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद संभावित हीरा भंडार का सटीक अनुमान लगाया जाएगा। किम्बरलाइट पाइप वह भूगर्भीय संरचना होती है, जहां प्राकृतिक हीरों की मौजूदगी की संभावना रहती है।

ड्रिलिंग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एक विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार की जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

नई दिल्ली में आयोजित एनसीएल बोर्ड की बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें एनएमडीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार और विनय कुमार शामिल थे।

बैठक में परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने और तकनीकी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

एनसीएल: केंद्र और राज्य का संयुक्त उपक्रम

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) का संयुक्त उपक्रम है।

इस संयुक्त कंपनी में:

  • एनएमडीसी लिमिटेड की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत
  • सीएमडीसी की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत

है।

अब तक कंपनी मुख्य रूप से लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद कंपनी बहु-खनिज विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

वैज्ञानिक परीक्षण में मिले थे प्राकृतिक हीरे

बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में हीरा भंडार की खोज के लिए एनसीएल ने विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया।

इनमें शामिल हैं:

  • स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग
  • भू-भौतिकीय सर्वेक्षण
  • लक्षित ड्रिलिंग

इन प्रक्रियाओं के जरिए क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई।

इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल को एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में परीक्षण के लिए भेजा गया। परीक्षण के दौरान 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए।

इस खोज ने वैज्ञानिक रूप से यह प्रमाणित कर दिया कि बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना मौजूद है।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मिल सकती है नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में इस क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन शुरू होता है, तो इससे न केवल छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

इसके अलावा, राज्य को राजस्व के रूप में भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। छत्तीसगढ़ पहले से ही लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिज संपदाओं के लिए जाना जाता है। ऐसे में हीरा खनन की संभावनाएं राज्य को देश के प्रमुख खनिज केंद्रों में और अधिक मजबूत बना सकती हैं।

फिलहाल, सभी की निगाहें आगामी ड्रिलिंग प्रक्रिया और उससे मिलने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं, जो इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य तय करेंगे।

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