देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने अपने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती द्वारा उठाई गई नैतिक और प्रशासनिक चिंताओं को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। बैंक ने कहा है कि दो स्वतंत्र बाहरी लॉ फर्मों द्वारा की गई विस्तृत कानूनी समीक्षा में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं, जो चक्रवर्ती के सार्वजनिक बयानों या उनके आरोपों का समर्थन करते हों।
एचडीएफसी बैंक ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया कि यह स्वतंत्र समीक्षा अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्म विल्सन सोनसिनी गुडरिच एंड रोसाटी, पीसी और भारतीय लॉ फर्म वाडिया गांधी एंड कंपनी द्वारा की गई थी। यह समीक्षा करीब तीन महीने तक चली और इसमें बैंक के कामकाज, बोर्ड बैठकों और आंतरिक प्रक्रियाओं की गहन जांच की गई।
मार्च 2026 में दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि एचडीएफसी बैंक के तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 17 मार्च 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि पिछले दो वर्षों के दौरान बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाएं और कार्यप्रणालियां सामने आईं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं।
चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में लिखा था, “पिछले दो वर्षों में मैंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी चीजें देखीं, जो मेरे व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों से मेल नहीं खातीं। यही मेरे इस्तीफा देने का मुख्य कारण है।”
उनके इस्तीफे ने बैंकिंग जगत में काफी हलचल मचा दी थी, क्योंकि यह पहली बार था जब एचडीएफसी बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा था। इस कदम के बाद बैंक की कार्यप्रणाली और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर कई सवाल उठने लगे थे।
व्यापक स्तर पर की गई जांच
एचडीएफसी बैंक ने बताया कि कानूनी समीक्षा के दौरान लॉ फर्मों ने चक्रवर्ती के इस्तीफे से पहले के दो वर्षों की गतिविधियों का विस्तार से अध्ययन किया। इस दौरान बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और विभिन्न समितियों की बैठकों के मिनट्स, एजेंडा दस्तावेज और हजारों आंतरिक रिकॉर्ड की जांच की गई।
समीक्षा प्रक्रिया में स्वतंत्र निदेशकों, विभिन्न समितियों के अध्यक्षों, बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी बातचीत की गई।
बैंक के अनुसार, लॉ फर्मों ने अतनु चक्रवर्ती से भी कई बार संपर्क करने और समीक्षा प्रक्रिया में शामिल होने का अनुरोध किया था, लेकिन उनका इंटरव्यू नहीं हो सका।
आरोपों के समर्थन में नहीं मिले सबूत
एचडीएफसी बैंक ने अपनी नियामकीय फाइलिंग में कहा कि विस्तृत जांच और साक्षात्कारों के बाद लॉ फर्मों ने निष्कर्ष निकाला कि चक्रवर्ती के सार्वजनिक बयानों और उनके निहितार्थों की पुष्टि उपलब्ध रिकॉर्ड या गवाहों के बयानों से नहीं होती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “व्यापक कानूनी समीक्षा पूरी करने के बाद यह पाया गया कि चक्रवर्ती के बयान और उनसे जुड़े आरोप उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के साक्षात्कारों से पुष्ट नहीं होते हैं।”
समीक्षा में यह भी सामने आया कि जिन बोर्ड बैठकों में अतनु चक्रवर्ती शामिल हुए थे, उनके रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से तैयार किए गए थे और अनुमोदन की मानक प्रक्रिया का पालन किया गया था। इन बैठकों के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की असहमति या चिंता दर्ज कराने का पूरा अवसर उपलब्ध था।
बैंक ने जताया भरोसा
एचडीएफसी बैंक ने कहा कि बोर्ड और उसकी विभिन्न समितियों के रिकॉर्ड, मीटिंग दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक बातचीत में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जो पूर्व चेयरमैन द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करता हो।
बैंक ने इस समीक्षा को कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया है। एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वह मजबूत प्रशासनिक ढांचे और उच्च नैतिक मानकों के साथ अपने संचालन को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अब बैंकिंग क्षेत्र और निवेशकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह मामला देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक की आंतरिक कार्यप्रणाली और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ा हुआ है।

