26 Jun 2026, Fri

सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करते थे ठगी, पुलिस ने किया गिरोह का पर्दाफाश, लाखों रुपयों का हेरफेर

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने सरकारी नौकरी और सस्ते सरकारी फ्लैट दिलाने का झांसा देकर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसकी कथित सरगना महिला को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि महिला ने बेरोजगार युवाओं को भारतीय वन सेवा (IFS) और अन्य सरकारी नौकरियों का लालच दिया, वहीं कई लोगों को सरकारी आवास सस्ते दामों पर दिलाने का दावा कर उनसे पैसे ऐंठ लिए।

पुलिस के मुताबिक, इस पूरे गिरोह की मास्टरमाइंड प्रमिला उर्फ प्रवीण तिवारी नामक महिला है, जिसे अब हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस ठगी नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

कई जिलों के युवाओं को बनाया शिकार

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने भोपाल, रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना समेत कई जिलों के युवाओं और कारोबारियों को अपना शिकार बनाया। बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली गई।

जानकारी के अनुसार, 12वीं पास एक युवक नवीन सोंधिया को 50 हजार रुपये लेकर भारतीय वन सेवा (IFS) में नौकरी दिलाने का दावा किया गया। इसके अलावा कई अन्य लोगों से भी सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए।

सरकारी फ्लैट दिलाने के नाम पर ठगी

गिरोह का दूसरा बड़ा खेल सरकारी आवासों को लेकर था। आरोप है कि प्रमिला उर्फ प्रवीण तिवारी भोपाल के वीआईपी इलाके न्यू मार्केट स्थित स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बन रहे सरकारी आवासों को बेहद कम कीमत पर दिलाने का दावा करती थी।

रंगमहल चौराहे के पास सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाए जा रहे हाई-राइज आवासीय प्रोजेक्ट के फ्लैटों को महिला निजी और आंशिक सरकारी परियोजना बताकर बेचने की कोशिश कर रही थी।

महिला लोगों को यह विश्वास दिलाती थी कि करोड़ों रुपये मूल्य के फ्लैट महज 22 लाख रुपये में उपलब्ध हैं। इसी लालच में कई लोग फंस गए।

कारोबारी से भी ठगे लाखों रुपये

पुलिस के अनुसार, पीड़ितों में एक कारोबारी प्रतीक जैन भी शामिल हैं। उन्हें वीआईपी इलाके में बेहद कम कीमत पर फ्लैट दिलाने का भरोसा दिलाया गया। इसके बदले उनसे डेढ़ लाख रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।

जब लंबे समय तक फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, तब पीड़ितों को शक हुआ। बाद में एक महिला पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

शिकायत के बाद खुला राज

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल सबूत जुटाए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी महिला फर्जी दस्तावेजों और झूठे वादों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा रही थी।

पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल है।

पुलिस करेगी नेटवर्क की जांच

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कई अन्य पीड़ित भी सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों, लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सरकारी नौकरी, सरकारी आवास या किसी भी सरकारी योजना के नाम पर किसी अज्ञात व्यक्ति को पैसे देने से पहले उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल जरूर करें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

फिलहाल, भोपाल पुलिस इस बहुचर्चित ठगी कांड की हर परत खोलने में जुटी हुई है।

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