23 Jun 2026, Tue

दिल्ली के LG सरदार टी एस संधु ने नवजीवन विहार के ‘जीरो वेस्ट कॉलोनी’ मॉडल की सराहना की

नई दिल्ली में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरे नवजीवन विहार के ‘जीरो वेस्ट कॉलोनी’ मॉडल को दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधु ने सराहा है। मंगलवार को उपराज्यपाल ने नवजीवन विहार का दौरा कर यहां चल रही विभिन्न पर्यावरणीय पहलों का निरीक्षण किया और इस मॉडल को दिल्ली की सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं में से एक बताया।

दौरे के दौरान उपराज्यपाल ने कॉलोनी में स्थापित रिड्यूस-रीयूज-रीसाइकल (RRR) सेंटर, विकेंद्रीकृत एरोबिक कंपोस्टिंग यूनिट्स, स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण (सोर्स सेग्रिगेशन) की व्यवस्था और वर्षा जल संचयन प्रणाली का विस्तार से जायजा लिया। उन्होंने इन व्यवस्थाओं को सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए इसकी प्रशंसा की।

उपराज्यपाल ने कहा कि नवजीवन विहार का यह मॉडल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि यदि स्थानीय समुदाय और निवासी संगठित होकर कार्य करें तो कचरा प्रबंधन जैसी बड़ी चुनौतियों का समाधान संभव है।

उन्होंने दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिए कि शहर की अन्य रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) को भी इस स्वावलंबी मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कम विकसित कॉलोनियों में भी ऐसे विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन और कंपोस्टिंग प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए विशेष फंडिंग व्यवस्था की संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

LG ने सुझाव दिया कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का प्रभावी उपयोग कर एरोबिन्स, कंपोस्टिंग यूनिट्स और RRR सेंटर्स जैसी आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। इससे उन क्षेत्रों में भी आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जा सकेगी, जहां संसाधनों की कमी है।

उपराज्यपाल ने कहा कि केवल सरकारी एजेंसियों के प्रयासों से कचरा प्रबंधन की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी की भावना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “कचरे से धन” बनाने की प्रक्रिया घर से ही शुरू होती है और यदि प्रत्येक परिवार अपने स्तर पर कचरे को अलग-अलग करना शुरू कर दे, तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब स्थानीय स्तर पर इतने प्रभावी मॉडल विकसित हो रहे हैं, तो समाधान के लिए दूसरे देशों या शहरों की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। दिल्ली के लोगों के पास खुद ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर पूरे शहर को स्वच्छ और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

दौरे के दौरान उपराज्यपाल ने नवजीवन विहार की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और स्थानीय निवासियों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कॉलोनी पिछले करीब आठ वर्षों से इस मॉडल को सफलतापूर्वक संचालित कर रही है।

जानकारी के अनुसार, इस पहल के माध्यम से अब तक 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को शहर के लैंडफिल स्थलों पर जाने से रोका जा चुका है। इससे न केवल कचरे का बोझ कम हुआ है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

उपराज्यपाल ने अंत में सभी नागरिकों, संस्थाओं और संबंधित एजेंसियों से अपील की कि वे संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करें और मिलकर स्वच्छ, सुरक्षित, समावेशी और विकसित दिल्ली के निर्माण में योगदान दें।

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