वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब इस समझौते के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों देशों के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अगली दौर की वार्ता फिलहाल टाल दी गई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर सहमति बनी थी, जिसमें संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने और कई विवादित मुद्दों पर 60 दिनों के भीतर विस्तृत बातचीत का रोडमैप तैयार किया गया था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की थी कि दोनों पक्ष प्रारंभिक समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर कर चुके हैं और आगे की तकनीकी वार्ताओं के जरिए स्थायी समाधान तलाशने की योजना थी।
हालांकि, स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक अब स्थगित कर दी गई है। व्हाइट हाउस ने बताया कि जेडी वेंस की प्रस्तावित स्विट्जरलैंड यात्रा फिलहाल टाल दी गई है और वार्ता की नई तारीखों पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। स्विस विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि शुक्रवार को होने वाली अमेरिका-ईरान बैठक अब आयोजित नहीं होगी।
इस बीच इजरायल और अमेरिका के बीच भी इस समझौते को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। जेडी वेंस ने कुछ इजरायली नेताओं द्वारा समझौते की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल के सबसे मजबूत सहयोगी हैं और समझौते को लेकर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी जानी चाहिए।
क्षेत्रीय हालात को और जटिल बनाने वाली बात यह है कि लेबनान में हिंसा का दौर जारी है। दक्षिणी लेबनान के नबातीह क्षेत्र में इजरायली हवाई हमलों और गोलाबारी में कई लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने पहले से ही नाजुक शांति प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि लेबनान में बढ़ती हिंसा ही वार्ता टलने की प्रमुख वजहों में से एक है।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि वह समझौते के क्रियान्वयन से पहले अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को लेकर स्पष्ट आश्वासन चाहता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि वह बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है और जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होंगी, तकनीकी स्तर की वार्ताएं शुरू की जाएंगी।
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदम पर टिकी हैं। शांति समझौते ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियां और कूटनीतिक मतभेद यह संकेत दे रहे हैं कि स्थायी समाधान तक पहुंचने का रास्ता अभी भी आसान नहीं है।

