17 Jun 2026, Wed

कर्नाटक में 8 बड़े अधिकारियों के 35 ठिकानों पर लोकायुक्त की छापेमारी, सोने-चांदी के गहने जब्त, 31 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

बेंगलुरु: भ्रष्टाचार के खिलाफ कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने राज्यभर में एक बड़ा अभियान चलाते हुए आठ सरकारी अधिकारियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 35 से अधिक स्थानों की तलाशी ली गई, जिसमें अधिकारियों के पास से लगभग 31.11 करोड़ रुपये की अघोषित चल और अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ। लोकायुक्त की यह कार्रवाई हाल के वर्षों में राज्य में चलाए गए सबसे बड़े भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में से एक मानी जा रही है।

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी बेंगलुरु शहर, बेंगलुरु ग्रामीण, दावणगेरे, कलबुर्गी और चिकमगलूर समेत कई जिलों में की गई। जांच टीमों ने अधिकारियों के घरों, कार्यालयों, रिश्तेदारों के आवासों और अन्य संपत्तियों की गहन तलाशी ली। कार्रवाई का उद्देश्य आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच करना था।

लोकायुक्त द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, तलाशी के दौरान लगभग 22.73 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 8.38 करोड़ रुपये की चल संपत्ति का पता चला। बरामद संपत्तियों में आलीशान मकान, आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट, कृषि भूमि, बैंक जमा, नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, लग्जरी वाहन और अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल हैं।

जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई उनमें कर्नाटक हाउसिंग बोर्ड में टाउन प्लानिंग के अतिरिक्त निदेशक राजन्ना एस.एल., बेस्कॉम के सहायक कार्यकारी अभियंता उदय कुमार एम.बी., उप वन संरक्षक हर्षवर्धन पी.एन., एनडब्ल्यूकेआरटीसी के मुख्य मैकेनिकल इंजीनियर सिद्धेश्वर एन. हेब्बल, केआरआईडीएल के अधीक्षण अभियंता सन्ना केनचप्पा, बयालुसीमे एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव कृष्णा नाइक एल.ए., लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता माणिक एस. कनकट्टे तथा सहायक वन संरक्षक के.एस. मोहन शामिल हैं।

जांच में सबसे अधिक संपत्ति राजन्ना एस.एल. के नाम पर सामने आई है। उनके पास से लगभग 7.10 करोड़ रुपये की संपत्ति और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पता चला। इसके अलावा माणिक एस. कनकट्टे के पास करीब 4.95 करोड़ रुपये और हर्षवर्धन पी.एन. के पास लगभग 4.85 करोड़ रुपये की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है।

लोकायुक्त टीम को कई स्थानों से बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती आभूषण भी मिले हैं। एक मामले में अधिकारियों ने करीब 37 लाख रुपये नकद और 1.23 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने-चांदी के गहने बरामद किए। इसके अलावा कई बैंक खातों, निवेश दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई उन शिकायतों और प्रारंभिक जांच रिपोर्टों के आधार पर की गई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार और जांच एजेंसियों की सख्त मंशा को भी स्पष्ट कर दिया है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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