15 Jun 2026, Mon

डिमर्जर के पहले दिन वेदांता ग्रुप ने बनाया ₹49,000 करोड़ की मार्केट वैल्यू का रिकॉर्ड, शेयर बाजार में मची हलचल

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार का दिन वेदांता समूह के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। लंबे समय से चर्चा में रहे वेदांता डिमर्जर के बाद समूह की चार नई कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई, जिसके साथ ही निवेशकों को बड़ा लाभ मिला। डिमर्जर के पहले ही दिन वेदांता समूह ने करीब ₹49,000 करोड़ की अतिरिक्त मार्केट वैल्यू अनलॉक कर दी। इस उपलब्धि ने बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

वेदांता समूह ने अपने विभिन्न कारोबारों को अलग-अलग कंपनियों में विभाजित कर उन्हें स्वतंत्र पहचान देने का फैसला किया था। इस रणनीति का उद्देश्य प्रत्येक बिजनेस की वास्तविक क्षमता और मूल्य को सामने लाना था। लिस्टिंग के बाद यह कदम सफल होता दिखाई दे रहा है, क्योंकि बाजार ने अलग-अलग कारोबारों को बेहतर मूल्यांकन दिया है।

सोमवार को ट्रेडिंग के दौरान वेदांता लिमिटेड और उसकी चार नई सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3.52 लाख करोड़ तक पहुंच गया। तुलना करें तो डिमर्जर से पहले 29 अप्रैल को वेदांता लिमिटेड का मार्केट कैप लगभग ₹3.03 लाख करोड़ था। इस तरह समूह की कुल बाजार पूंजीकरण में करीब ₹49,000 करोड़ का इजाफा देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि निवेशक अब प्रत्येक कारोबार की स्वतंत्र क्षमता को अधिक महत्व दे रहे हैं।

नई सूचीबद्ध कंपनियों में सबसे अधिक चर्चा वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड की रही। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.94 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो डिमर्जर से पहले पूरी वेदांता लिमिटेड की वैल्यू के 60 प्रतिशत से भी अधिक है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एल्युमिनियम कारोबार समूह की सबसे मजबूत और मूल्यवान परिसंपत्तियों में शामिल है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह कंपनी अपने क्षेत्र में और मजबूत प्रदर्शन कर सकती है।

इसके अलावा, वेदांता पावर लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹15,947 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड की वैल्यू करीब ₹14,116 करोड़ और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड की वैल्यू लगभग ₹8,235 करोड़ आंकी गई। हालांकि लिस्टिंग के पहले दिन सभी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। कुछ शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जबकि कुछ ने निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते ऊपरी सर्किट को छू लिया।

डिमर्जर का सबसे बड़ा फायदा कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों को मिला है। योजना के तहत रिकॉर्ड डेट के अनुसार वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक शेयरधारक को नई चार कंपनियों का एक-एक शेयर आवंटित किया गया। इससे निवेशकों को एक ही समूह के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों—जैसे एल्युमिनियम, बिजली, तेल एवं गैस तथा आयरन एंड स्टील—में सीधी हिस्सेदारी रखने का अवसर मिला है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि डिमर्जर से पहले वेदांता का विविध कारोबार एक ही कंपनी के अंतर्गत संचालित होता था, जिसके कारण कंपनी तथाकथित “कांग्लोमेरेट डिस्काउंट” का सामना कर रही थी। निवेशकों के लिए अलग-अलग व्यवसायों की वास्तविक कीमत का आकलन करना कठिन था। अब स्वतंत्र कंपनियों के रूप में कारोबार सामने आने से उनकी सही वैल्यू निर्धारित करना आसान हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन जारी रखती हैं, तो भविष्य में वेदांता समूह की कुल वैल्यू में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। फिलहाल डिमर्जर की यह सफलता भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।

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