19 Jun 2026, Fri

क्या है नागौद रॉयल फैमिली का इतिहास? राजा की पत्नी को सौतन ने मारी गोली, मचा हड़कंप

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले में हाल ही में सामने आए एक हाई-प्रोफाइल गोलीकांड ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह मामला किसी आम परिवार से नहीं, बल्कि राज्य के चर्चित नागौद राजघराने से जुड़ा है। पारिवारिक विवाद के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद जहां पुलिस जांच में जुटी है, वहीं लोगों के बीच इस ऐतिहासिक राजपरिवार को लेकर जिज्ञासा भी बढ़ गई है। नागौद राजघराना अपने गौरवशाली इतिहास, राजनीतिक प्रभाव और शाही विरासत के लिए जाना जाता रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह विवाद पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा के परिवार से जुड़ा है। आरोप है कि पारिवारिक विवाद सुलझाने पहुंची उनकी पहली पत्नी योगिता सिंह पर दूसरी महिला सुनीता सिंह ने गोली चला दी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस घटना ने शाही परिवार के भीतर चल रहे विवादों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है।

नागौद राजघराने का इतिहास करीब 700 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है। मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित यह रियासत परिहार राजपूत वंश से जुड़ी रही है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 1344 ईस्वी में राजा वीरराज जूदेव ने इस रियासत की स्थापना की थी। शुरुआत में इस क्षेत्र को उचेहरा के नाम से जाना जाता था, लेकिन वर्ष 1720 के आसपास इसका नाम बदलकर नागौद कर दिया गया, जो बाद में रियासत की पहचान बन गया।

इतिहासकारों का मानना है कि नागौद के परिहार शासक कन्नौज के प्रसिद्ध गुर्जर-प्रतिहार वंश के वंशज थे। यह राजवंश अपनी सैन्य शक्ति, प्रशासनिक क्षमता और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जाना जाता था। नागौद रियासत ने लंबे समय तक बुंदेलखंड और बघेलखंड क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वतंत्रता के बाद भारत में रियासतों के विलय की प्रक्रिया के तहत नागौद रियासत का भी भारतीय संघ में समावेश हुआ। रियासत के अंतिम शासक श्रीमंत महेंद्र सिंह जू देव बहादुर ने 1 जनवरी 1950 को विलय संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही नागौद रियासत का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया, लेकिन शाही परिवार की सामाजिक और राजनीतिक पहचान आज भी बनी हुई है।

वर्तमान में नागौद राजपरिवार की विरासत का नेतृत्व राजा श्रीमंत शिवेंद्र सिंह जू देव बहादुर कर रहे हैं। परिवार की ऐतिहासिक संपत्ति परसमनिया गढ़ी आज भी इस शाही इतिहास की गवाह मानी जाती है। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि राजपरिवार की पहचान का प्रमुख केंद्र भी है।

हालिया गोलीकांड ने एक बार फिर नागौद राजघराने को सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि यह मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, लेकिन इसके बहाने लोगों की रुचि इस ऐतिहासिक राजवंश और उसकी विरासत को जानने में भी बढ़ी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच के बाद घटना की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल नागौद राजघराना पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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