बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को 200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर कानूनी झटका लगा है। उनकी याचिका पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने खुद को मामले से अलग कर लिया है, जिसके बाद अब यह मामला किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
यह मामला कथित तौर पर ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल जज प्रशांत कुमार मिश्रा ने मामले से खुद को अलग करने की वजह बताते हुए कहा कि एक संबंधित केस में उनके परिवार से जुड़े सदस्य सरकार की ओर से पेश हुए थे, इसलिए वे इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते। इसके बाद पीठ ने निर्देश दिया कि याचिका को अब 25 जून को ऐसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें मौजूदा जज शामिल न हों।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ कर रही थी, लेकिन अब नई पीठ को केस सौंपा जाएगा।
पूरा मामला क्या है?
यह पूरा मामला करीब 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें जांच एजेंसी ईडी का आरोप है कि सुकेश चंद्रशेखर ने जेल में रहते हुए एक संगठित ठगी रैकेट चलाया। आरोप है कि उसने खुद को सरकार का वरिष्ठ अधिकारी बताकर कई लोगों से भारी रकम वसूली।
जांच के दौरान ईडी ने दावा किया कि जैकलीन फर्नांडिस सुकेश चंद्रशेखर के संपर्क में थीं और उन्हें कीमती उपहार भी मिले थे। इन तथ्यों के आधार पर उन्हें बाद में मामले में आरोपी बनाया गया।
अदालत की पिछली कार्रवाई
दिल्ली की एक अदालत पहले ही इस केस में आरोप तय करने का आदेश दे चुकी है। साथ ही मकोका और अन्य गंभीर धाराओं के तहत भी कई आरोपियों पर कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है।
जैकलीन की याचिका
जैकलीन ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें ईडी की कार्यवाही को बरकरार रखा गया था। उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है और उनके खिलाफ आरोप निराधार हैं।
आगे क्या होगा?
अब यह मामला किसी नई पीठ को सौंपा जाएगा, जो अगली सुनवाई में तय करेगी कि जैकलीन की याचिका पर आगे क्या कार्रवाई की जाए। तब तक यह केस फिलहाल लिस्टिंग चरण में रहेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया नई बेंच पर निर्भर करेगी।

