भोपाल: मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिसके बाद तीसरी सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ राज्य के मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को मैदान में उतारकर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार देर रात महेश केवट के नाम पर मुहर लगाई। इससे पहले पार्टी की ओर से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया जा चुका था। महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ ही राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, महेश केवट के नाम पर अंतिम निर्णय लेने से पहले भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बैठक में राजनीतिक स्थिति और विधानसभा में संख्या बल का आकलन करने के बाद केवट के नाम पर सहमति बनी। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने उनके नाम को अंतिम मंजूरी प्रदान की।
दूसरी ओर कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। मीनाक्षी सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी। इससे पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पार्टी नेताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए नटराजन की जीत का दावा किया था।
मध्यप्रदेश विधानसभा की वर्तमान स्थिति को देखें तो कुल 230 सदस्यों में से प्रभावी मतों की संख्या 228 है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। हालांकि कुछ तकनीकी परिस्थितियों के कारण कांग्रेस का प्रभावी आंकड़ा 62 तक सीमित माना जा रहा है। विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर रोक लगी हुई है, जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे के मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और उनका झुकाव भाजपा की ओर बताया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के गणित के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होगी। इस हिसाब से भाजपा अपने संख्या बल के दम पर दो सीटों पर जीत सुनिश्चित कर सकती है। दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचेंगे। तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी।
यहीं से चुनाव का रोमांच बढ़ जाता है। कांग्रेस के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या दिखाई देती है, लेकिन भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारने के बाद क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय या अन्य विधायकों के समर्थन की संभावनाओं पर भी नजरें टिक गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। वहीं कांग्रेस के लिए मीनाक्षी नटराजन की जीत प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है।
मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और संभावित राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

