पटना: बिहार विधान परिषद द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने इस बार भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह को भी एमएलसी चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। टिकट मिलने के बाद पवन सिंह ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और भी हवा मिल गई है।
जानकारी के अनुसार, पवन सिंह ने इस मुलाकात के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय मयूख के साथ मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान पार्टी के कई अहम मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। मुलाकात के दौरान भाजपा के अन्य प्रत्याशी भी मौजूद रहे।
भाजपा ने हाल ही में विधान परिषद चुनाव के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी, जिसमें पवन सिंह के अलावा अनिल ठाकुर और शीला पंडित को भी टिकट दिया गया है। पार्टी के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पवन सिंह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े और लोकप्रिय चेहरों में से एक हैं, जिनकी उत्तर बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र में मजबूत फैन फॉलोइंग है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर साझा की। उन्होंने पवन सिंह और संजय मयूख के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा (एनडीए) की ओर से घोषित सभी प्रत्याशियों को उन्होंने शुभकामनाएं दी हैं और उनकी जीत की कामना की है।
सीएम की इस पोस्ट पर पवन सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी और धन्यवाद व्यक्त करते हुए लिखा, “आपको दिल से धन्यवाद एवं सादर प्रणाम।” इस जवाब के बाद राजनीतिक गलियारों में यह मुलाकात और भी चर्चा का विषय बन गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पवन सिंह की लोकप्रियता का लाभ भाजपा को चुनाव में मिल सकता है। भोजपुरी सिनेमा में उनकी मजबूत पकड़ और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता पार्टी के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट मानी जा रही है।
हालांकि, अभी यह देखना दिलचस्प होगा कि पवन सिंह राजनीति में कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं और क्या वे अपने फिल्मी करियर के साथ-साथ राजनीतिक जिम्मेदारियों को भी सफलतापूर्वक निभा पाते हैं या नहीं।
फिलहाल, उनके टिकट मिलने और मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और सभी की नजरें अब आगामी विधान परिषद चुनाव पर टिकी हुई हैं।

