7 Jun 2026, Sun

‘मेरी यूसुफ पठान से नहीं हुई कोई बात’, ममता बनर्जी की तरफ से संपर्क करने वाली बात पर सौरव गांगुली ने दी सफाई

कोलकाता: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व क्रिकेटर व मौजूदा सांसद यूसुफ पठान से जुड़े एक कथित विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूरी तरह से सफाई दी है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि गांगुली ने ममता बनर्जी और यूसुफ पठान के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभाई थी, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है।

सौरव गांगुली ने कहा कि उनके बारे में जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो ममता बनर्जी ने उनसे कभी यूसुफ पठान को कोई संदेश देने को कहा और न ही उन्होंने खुद इस तरह की कोई बातचीत की। गांगुली ने कहा कि बिना किसी तथ्य की जांच किए उनके नाम को इस विवाद में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

गांगुली ने मीडिया और जनता से अपील की कि किसी भी खबर को बिना पुष्टि के न मानें। उन्होंने कहा कि आज के समय में अफवाहें तेजी से फैलती हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूरी है। उन्होंने इस पूरे मामले को “निराधार और गलत व्याख्या पर आधारित” बताया।

पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने यूसुफ पठान से भी इस तरह की किसी राजनीतिक बातचीत या संदेश के संबंध में कोई संपर्क नहीं किया है। उनके अनुसार, यह पूरा मामला गलत जानकारी और अटकलों पर आधारित है, जिसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया जा रहा है।

गौरतलब है कि अफवाहों में यह दावा किया गया था कि ममता बनर्जी किसी राजनीतिक रणनीति के तहत संसद में जगह बनाने के लिए यूसुफ पठान की सीट से जुड़े मुद्दे पर चर्चा कर रही थीं और इस कथित बातचीत में सौरव गांगुली को मध्यस्थ बताया गया था। हालांकि अब गांगुली ने इन सभी बातों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इस पूरे विवाद के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी उठा कि आखिर यूसुफ पठान कौन हैं। यूसुफ पठान भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑलराउंडर रहे हैं और अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। वह राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी आईपीएल टीमों के लिए भी खेल चुके हैं और बाद में राजनीति में सक्रिय हुए।

गांगुली के इस बयान के बाद मामला काफी हद तक शांत होता दिख रहा है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि बिना पुष्टि के फैली अफवाहें कैसे बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं।

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