5 Jun 2026, Fri

यूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% बढ़ी, अधिवक्ताओं ने सीएम योगी का जताया आभार

उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस में महत्वपूर्ण वृद्धि करने का फैसला लिया है। इस निर्णय का प्रदेश भर के अधिवक्ताओं ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया है। अधिवक्ता समुदाय ने इसे न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है।

सरकारी वकीलों का कहना है कि लंबे समय से फीस पुनरीक्षण की मांग की जा रही थी। बदलते न्यायिक परिवेश, मुकदमों की बढ़ती संख्या और कानूनी मामलों की जटिलता को देखते हुए पारिश्रमिक संरचना में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जरूरत को समझते हुए इस दिशा में पहल की और मंत्रिमंडल ने फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

अधिवक्ताओं के अनुसार यह केवल आर्थिक लाभ का मामला नहीं है, बल्कि राज्य के हितों की प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकारी मामलों की सुनवाई के दौरान वकीलों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

यह निर्णय जिला न्यायालयों से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत तक राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले सभी अधिवक्ताओं को लाभ पहुंचाएगा। इसमें जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता, न्याय मित्र, हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ के अधिवक्ता, महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर और सुप्रीम कोर्ट में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड शामिल हैं।

अधिवक्ताओं ने बताया कि जनपद स्तर के सरकारी वकीलों की फीस में लगभग 10 वर्षों बाद संशोधन किया गया है, जबकि महाधिवक्ता स्तर पर यह बदलाव करीब 14 वर्षों के बाद हुआ है। ऐसे में यह फैसला सरकार की संवेदनशीलता और न्यायिक तंत्र के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार द्वारा रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस में करीब 50 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। अधिवक्ताओं का मानना है कि इससे न्यायालयों में राज्य सरकार का पक्ष और अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा तथा महत्वपूर्ण मामलों में बेहतर कानूनी सहायता उपलब्ध होगी।

अधिवक्ता समुदाय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने उनके योगदान और जिम्मेदारियों को सम्मान दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल अधिवक्ताओं के हित में है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और राज्य के हितों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि फीस वृद्धि का यह निर्णय उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह राज्य सरकार की सुशासन और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

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