नई दिल्ली: भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और इसके इतिहास में कई ऐसी ट्रेनें रही हैं जिन्होंने यात्रा के अनुभव को नई पहचान दी। इन्हीं में से एक है राजधानी एक्सप्रेस, जिसे भारतीय रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में गिना जाता है। आज भी यह ट्रेन तेज गति, बेहतर सुविधाओं और समयबद्ध संचालन के लिए जानी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस ट्रेन का नाम ‘राजधानी एक्सप्रेस’ क्यों रखा गया और इसकी शुरुआत की जरूरत आखिर क्यों पड़ी थी?
दरअसल, राजधानी एक्सप्रेस का नाम उसके उद्देश्य से जुड़ा हुआ है। इस ट्रेन को देश की राजधानी नई दिल्ली को विभिन्न राज्यों की राजधानियों और प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए शुरू किया गया था। इसी वजह से इसे ‘राजधानी एक्सप्रेस’ नाम दिया गया। यह केवल एक ट्रेन नहीं थी, बल्कि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम भी थी।
राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत 3 मार्च 1969 को हुई थी। पहली राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली और हावड़ा (कोलकाता) के बीच चलाई गई थी। उस समय इस ट्रेन में केवल 9 कोच थे, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार थी। लगभग 1450 किलोमीटर की दूरी को यह ट्रेन महज 17 घंटे 20 मिनट में पूरा करती थी, जो उस दौर में किसी उपलब्धि से कम नहीं था।
यह भारत की पहली पूर्णतः वातानुकूलित (फुल एसी) एक्सप्रेस ट्रेन भी थी। शुरुआत में इसे डीजल इंजन से चलाया जाता था। बाद में इसकी लोकप्रियता और सफलता को देखते हुए मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, पटना, भुवनेश्वर समेत कई बड़े शहरों को राजधानी सेवा से जोड़ा गया। वर्तमान में देशभर में 25 से अधिक राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें संचालित की जा रही हैं।
1960 के दशक में भारतीय रेलवे की औसत गति काफी कम थी और लंबी दूरी की यात्राएं समय लेने वाली होती थीं। रेलवे प्रशासन चाहता था कि प्रमुख शहरों और राजधानी के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाया जाए। इसी उद्देश्य से एक हाई-स्पीड ट्रेन की अवधारणा विकसित की गई। रेलवे के अनुसंधान एवं विकास संगठन ने इस दिशा में कई वर्षों तक काम किया और अंततः राजधानी एक्सप्रेस अस्तित्व में आई।
राजधानी एक्सप्रेस की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। इस ट्रेन को रेलवे नेटवर्क पर सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जिसके कारण इसे अन्य ट्रेनों की तुलना में कम रुकावटों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यात्रियों को वातानुकूलित कोच, बेहतर भोजन, साफ-सफाई, मोबाइल चार्जिंग सुविधा और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।
समय के साथ राजधानी एक्सप्रेस में आधुनिक तकनीक भी जोड़ी गई है। अब इन ट्रेनों में एलएचबी कोच और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन लगाए जाते हैं, जिससे उनकी गति और सुरक्षा दोनों में सुधार हुआ है। कई रूटों पर राजधानी एक्सप्रेस 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ती है।
वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों के आने के बावजूद राजधानी एक्सप्रेस की लोकप्रियता बरकरार है। भारतीय रेलवे के इतिहास में यह ट्रेन आज भी तेज, भरोसेमंद और प्रीमियम यात्रा का प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि राजधानी एक्सप्रेस को आज भी भारतीय रेलवे की ‘किंग ऑफ ट्रेन’ कहा जाता है।

