तेहरान: ईरान की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपना इस्तीफा ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को संबोधित पत्र के माध्यम से सौंपा है। इस्तीफे के साथ राष्ट्रपति ने देश की सत्ता व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
बताया जा रहा है कि अपने पत्र में पेज़ेश्कियन ने कहा है कि राष्ट्रपति पद और उनकी सरकार को देश के महत्वपूर्ण नीतिगत और रणनीतिक फैसलों से लगभग पूरी तरह अलग कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनी हुई सरकार की भूमिका लगातार कमजोर होती जा रही है और कई अहम निर्णय ऐसे संस्थानों द्वारा लिए जा रहे हैं जो प्रत्यक्ष रूप से जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उनके अनुसार, प्रशासनिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर अब सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि सरकार अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो गया है, जिससे लोकतांत्रिक और संस्थागत प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
पेज़ेश्कियन का यह इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते तथा क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिशों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं चल रही हैं। माना जा रहा है कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार और अन्य शक्तिशाली संस्थाओं के बीच मतभेद लंबे समय से बने हुए थे।
अपने पत्र में राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ईरान का प्रशासनिक ढांचा अपने आधिकारिक और कानूनी मार्ग से भटकता दिखाई दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनी हुई सरकारों की भूमिका सीमित होती रही तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता प्रभावित होगी, बल्कि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी कमजोर हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कई महीनों से ईरान के भीतर सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और विदेश संबंधों को लेकर भी कई स्तरों पर मतभेद देखे गए हैं। ऐसे में राष्ट्रपति का इस्तीफा इन तनावों को सार्वजनिक रूप से सामने लाने वाली सबसे बड़ी घटना माना जा रहा है।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सर्वोच्च नेतृत्व ने पेज़ेश्कियन का इस्तीफा स्वीकार किया है या नहीं। ईरानी कानून के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में आगे की संवैधानिक प्रक्रिया सर्वोच्च नेतृत्व और संबंधित संस्थाओं के निर्णय पर निर्भर करती है।
इस घटनाक्रम ने ईरान की आंतरिक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है, तो इसका असर न केवल देश की घरेलू राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें तेहरान पर टिकी हुई हैं, जहां आने वाले दिनों में राजनीतिक स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

