नई दिल्ली: डायबिटीज आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस बीमारी के कई सामान्य लक्षण होते हैं, जिनमें अत्यधिक प्यास लगना, थकान महसूस होना, वजन घटना और बार-बार पेशाब आना शामिल है। खासतौर पर बार-बार पेशाब आने की समस्या कई मरीजों को परेशान करती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को “पॉलीयूरिया” कहा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डायबिटीज के मरीजों को सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा बार पेशाब क्यों आता है? इसके पीछे शरीर की एक महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया काम करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है तो उसका शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता। इंसुलिन वह हार्मोन है जो शरीर की कोशिकाओं तक ग्लूकोज पहुंचाने का काम करता है। जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो खून में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है।
सामान्य परिस्थितियों में हमारी किडनियां खून को फिल्टर करती हैं और आवश्यक ग्लूकोज को वापस शरीर में अवशोषित कर लेती हैं। लेकिन जब ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो किडनियां अतिरिक्त ग्लूकोज को पूरी तरह अवशोषित नहीं कर पातीं। परिणामस्वरूप यह अतिरिक्त ग्लूकोज पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकलने लगता है।
यहीं से समस्या शुरू होती है। अतिरिक्त ग्लूकोज अपने साथ पानी को भी खींचता है। इस प्रक्रिया को ऑस्मोसिस कहा जाता है। जब ग्लूकोज अधिक मात्रा में यूरिन के जरिए बाहर निकलता है, तो शरीर से भी बड़ी मात्रा में पानी निकल जाता है। इससे मूत्राशय जल्दी भरने लगता है और व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है।
बार-बार पेशाब आने के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इसके जवाब में मस्तिष्क शरीर को अधिक पानी पीने का संकेत देता है, जिससे मरीज को बार-बार प्यास लगती है। मरीज ज्यादा पानी पीता है और फिर ज्यादा पेशाब आता है। इस तरह एक चक्र बन जाता है जो दिन और रात दोनों समय जारी रह सकता है। रात में बार-बार पेशाब आने की स्थिति को मेडिकल भाषा में “नोक्टुरिया” कहा जाता है।
डायबिटीज के मरीजों में बार-बार पेशाब आने की एक अन्य वजह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) भी हो सकती है। यूरिन में अधिक ग्लूकोज होने के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में पेशाब के दौरान जलन और बार-बार टॉयलेट जाने की समस्या भी हो सकती है।
इसके अलावा डायबिटीज की कुछ आधुनिक दवाएं, विशेष रूप से SGLT2 इनहिबिटर्स, शरीर से अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने का काम करती हैं। इन दवाओं का असर भी पेशाब की आवृत्ति बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या से बचने का सबसे प्रभावी तरीका ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना है। नियमित दवाओं का सेवन, संतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याओं में काफी राहत मिल सकती है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

