29 May 2026, Fri

शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1100 अंक टूटा, निफ्टी 23,550 के नीचे फिसला; औंधे मुंह गिरे ऑटो और मेटल के शेयर

 

मुंबई: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। शुक्रवार को बाजार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ ही बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स करीब 1100 अंक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 भी महत्वपूर्ण स्तरों को गंवाते हुए 23,550 के नीचे बंद हुआ।

बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कमजोर वैश्विक संकेत, मानसून को लेकर बढ़ती चिंताएं और विभिन्न सेक्टरों में मुनाफावसूली ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही और अधिकांश शेयर दबाव में नजर आए।

कारोबार समाप्त होने पर एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स में भी बड़ी कमजोरी दर्ज की गई। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का असर साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में लगभग 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से अधिक टूट गया।

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। ऑटो, मेटल, एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

निफ्टी के सबसे अधिक नुकसान झेलने वाले शेयरों में आयशर मोटर्स, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, ओएनजीसी और बजाज ऑटो शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा। दूसरी ओर, गिरते बाजार में भी कुछ आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने मजबूती दिखाई। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के शेयर हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में आई इस गिरावट की एक प्रमुख वजह भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) द्वारा मानसून को लेकर जारी किया गया नया अनुमान भी है। देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच मानसून के पूर्वानुमान में संशोधन से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कमजोर मानसून का असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।

इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बनाया। कई निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार में बिकवाली और तेज हो गई।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति, वैश्विक आर्थिक संकेतक और कॉर्पोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में फैसले लेने से बचें और लंबी अवधि के निवेश दृष्टिकोण को बनाए रखें।

शुक्रवार की इस बड़ी गिरावट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है और निवेशकों को सतर्कता के साथ निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।

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